लुधियाना में विभिन्न हिंदू संगठनों से जुड़ी चार व्यक्तियों के खिलाफ जिला पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। इन चारों पर आरोप है कि वे फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट साझा कर रहे थे, जिससे देश की एकता को खतरा उत्पन्न हो रहा है। इनकी हेट स्पीच के चलते विभिन्न धर्मों के बीच तनाव और दुश्मनी को बढ़ावा मिलने का अंदेशा है। वर्तमान में, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के साथ ही उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी का कार्य शुरू कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना हैबोवाल की पुलिस ने हिंदू संगठन के सदस्य रोहित, जो मोहल्ला स्टार सिटी का निवासी है, के खिलाफ धारा 152, 196, और 353 BNS के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि रोहित अपने सोशल मीडिया खातों से निरंतर हेट स्पीच देता रहा है। इसके साथ ही, थाना डिवीजन नंबर 4 की पुलिस ने हिंदू सिख जागृति सेना के अध्यक्ष और हिंदू न्याय पीठ के सदस्य प्रवीण डंग के खिलाफ भी कार्रवाई की है। डंग पर आरोप है कि उसने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर भड़काऊ भाषण और अपमानजनक बयानबाजी की है, जिसके चलते उसके खिलाफ 196(1) और 353(2) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया है।
थाना डिवीजन नंबर 1 की पुलिस ने शिवसेना के नेता चंद्रकांत चड्ढा के खिलाफ भी हेट स्पीच के मामले में एक्शन लिया है। चड्ढा पर भी धारा 196(1) और 353(2) BNS के तहत आरोप लगाया गया है। इसी क्रम में, थाना डिवीजन नंबर 3 की पुलिस ने शिवसेना पंजाब के सदस्य भानू प्रताप पर भी हेट स्पीच देने का मामला दर्ज किया है। भानू पर आरोप है कि उसने फेसबुक के माध्यम से सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने की कोशिश की है। इसके परिणामस्वरूप, भानू प्रताप पर धारा 196(2) और 353(2) BNS के तहत केस दर्ज किया गया है।
भानू प्रताप ने इस पूरे मामले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि वह पिछले एक साल से किसी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान नहीं दे रहे हैं और अपने व्यवसाय में व्यस्त हैं। उनका कहना है कि पंजाब में “खालिस्तान मुर्दाबाद” कहने के कारण उन पर FIR दर्ज हुई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन के द्वारा हिंदू नेताओं पर की जा रही कार्रवाई पर चिंता जताई और यह भी कहा कि उन्हें सुबह इस केस के बारे में जानकारी मिली। बावजूद इसके, वह अपने धर्म के कार्यों को लेकर पीछे हटने का इरादा नहीं रखते हैं। इतना ही नहीं, भानू सहित अन्य तीन नेताओं के मोबाइल फोन भी इस समय स्विच ऑफ चल रहे हैं, जिससे गिरफ्तारी की कार्रवाई और भी जटिल होती जा रही है।
इस मामले ने लुधियाना में धार्मिक और सामाजिक तनाव को एक बार फिर से उजागर किया है। पुलिस प्रशासन की सख्ती के साथ ही इस घटना ने अन्य संगठनों को भी सतर्क कर दिया है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या ये आरोपी अपनी बातों को साबित कर पाएंगे या फिर कानून के कटघरे में आएंगे।