पंजाब के कई हिस्सों में पराली जलाने के कारण चंडीगढ़ की हवा बेहद प्रदूषित हो गई है, जिससे यहाँ की वायु गुणवत्ता गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह 5 बजे चंडीगढ़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 341 तक पहुंच गया, जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति दिल्ली की तुलना में भी अधिक चिंताजनक बन गई है। विशेष रूप से मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति बेहद खराब रही, जहां AQI 270 दर्ज किया गया। वहीं, राज्य में ठंड की शुरुआत भी हो चुकी है और तापमान में गिरावट देखी जा रही है।
मौसम विभाग ने बताया है कि पिछले 24 घंटे में औसत अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री की गिरावट आई है, जो सामान्य से 1.7 डिग्री कम है। पंजाब के कई शहरों में धुंध का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिससे दृश्यता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। चंडीगढ़ में रविवार को AQI 339 तक पहुंच गया था, जबकि दिल्ली में यह 334 दर्ज किया गया। चंडीगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में AQI के स्तर में गिरावट आ रही है, जैसे कि सेक्टर-22 में AQI 337 और मोहाली के सेक्टर-53 में AQI 341 दर्ज किया गया।
पंजाब में रविवार को पराली जलाने के 345 मामले सामने आए हैं, जिसमें सबसे अधिक मामले संगरूर से जुड़े हैं। यहां 116 घटनाएं हुईं हैं, और राज्य भर में अब तक कुल 2063 खेतों में आग लगाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पिछले वर्ष की तुलना में पराली जलाने के मामलों में 26 प्रतिशत की कमी आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, मौजूदा स्थिति चिंताजनक है और यदि इसे समय पर नियंत्रित न किया गया, तो यह निरंतर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में कई उपायों को अपनाना आवश्यक है। बाहर जाते समय मास्क पहनना, संतुलित आहार लेना और घर की हवा को शुद्ध रखने के लिए पौधे लगाना आवश्यक है। इसके अलावा, धूम्रपान से परहेज करने और घर से कम बाहर निकलने की सलाह दी गई है। पंजाब के प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान भी विभिन्न स्तरों पर दर्ज किया गया है। चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान रविवार को 29.6 डिग्री रहा, जबकि अन्य शहरों जैसे अमृतसर, जालंधर और पटियाला में भी तापमान में गिरावट देखी गई है।
इस प्रकार, चंडीगढ़ और पंजाब के अन्य क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता और तापमान को लेकर स्थिति चिंताजनक है। विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन को आवश्यक कदम उठाते रहना होगा ताकि एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके और प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके।