पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान: कोरोना के बाद बेसिक क्रिटिकल केयर ट्रेनिंग अनिवार्य!

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पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने हाल ही में एक चिकित्सकीय कार्यक्रम के दौरान कोरोना महामारी के समय स्वास्थ्य सेवाओं में आई चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब कोरोना का संकट आया, तब हमारे पास स्वास्थ्य सेवाओं की आधारभूत संरचना तो थी, लेकिन क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुईं। यह बात उन्होंने माता कौशल्या अस्पताल में ‘क्रिटिकल केयर: रीचिंग आउट टू मासेज’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय निरंतर मेडिकल शिक्षा कार्यक्रम (CME) के दौरान कही। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि हर एक मेडिकल ग्रेजुएट के लिए क्रिटिकल केयर का बुनियादी प्रशिक्षण बेहद आवश्यक है, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि केवल क्रिटिकल केयर ही नहीं, बल्कि बेसिक लाइफ स्किल्स की ट्रेनिंग भी सभी चिकित्सा छात्रों के लिए अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं के समय प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह कई जानों को बचाने में सहायक सिद्ध हो सकती है। इसलिए, सभी मेडिकल प्रशिक्षुओं को इस कौशल में प्रशिक्षित करना आवश्यक है ताकि वे भविष्य में किसी भी प्रकार की आपात स्थिति का सामना कर सकें।

डॉ. बलबीर सिंह ने मीडिया और पैरामेडिकल स्टाफ से भी अपील की कि वे जरूरतमंद लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें। उन्होंने समझाया कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी क्लीनिकल स्किल्स में निरंतर सुधार करना चाहिए। यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवाएं देते समय सभी कर्मचारियों को नई तकनीकियों एवं ज्ञान के साथ अद्यतन रहना चाहिए, जिससे वे बेहतर सेवा दे सकें और मरीजों की जान बचा सकें।

इस CME कार्यक्रम का आयोजन डॉ. हरिंदर पाल सिंह के नेतृत्व में किया गया था, जिसमें पटियाला के प्रमुख डॉक्टरों ने भाग लिया। इस अवसर पर माता कौशल्या अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जगपालिंदर सिंह समेत अन्य चिकित्सक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर शिक्षा को बढ़ावा देना और क्रिटिकल केयर के महत्व को समझाना था। मंत्री के बयान और इस कार्यक्रम के आयोजन ने यह स्पष्ट किया है कि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देने पर जोर देना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी आपदा का समना किया जा सके।

इस कार्यक्रम ने न केवल चिकित्सा जगत को जागरूक करने का कार्य किया, बल्कि समाज में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता फैलाने का भी प्रयास किया। अंततः, डॉ. बलबीर सिंह के विचारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने के लिए उचित प्रशिक्षण और जागरूकता कितनी आवश्यक हैं, जिससे हम समाज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें।