गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर भव्य नगर कीर्तन का आयोजन!

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अमृतसर | श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य नगर कीर्तन का आयोजन गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के परिसर में किया गया। यह नगर कीर्तन जीएनडीयू के गुरुद्वारा साहिब से आरंभ हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. जसपाल सिंह संधू के साथ-साथ शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक विभागों के प्रमुख, शिक्षक और कर्मचारी भी enthusiastically शामिल हुए। इस भव्य नगर कीर्तन का आयोजन पंज प्यारों की अगुवाई में हुआ और यह श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन के बाद यूनिवर्सिटी के गुरुद्वारा साहिब में समाप्त हुआ।

इस दौरान, कीर्तन ने विश्वविद्यालय परिसर में एक जीवंत और आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया। नगर कीर्तन ने विभिन्न स्थानों की यात्रा की, जिसमें लॉ डिपार्टमेंट, साहिबजादा जुझार सिंह हॉस्टल, और जोरावर सिंह हॉस्टल शामिल थे। हर जगह कीर्तन का भव्य स्वागत किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया।

गुरु नानक देव जी की जयंती के इस महान अवसर पर, छात्रों और शिक्षकों ने अपने आध्यात्मिक भावों को साझा किया और गुरबाणी का गायन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गुरु नानक देव जी के सिद्धांतों और शिक्षाओं को फैलाना और समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना था। प्रशासनिक ब्लॉक और भाई गुरदास लाइब्रेरी के सामने भी कीर्तन का धूमधाम से स्वागत किया गया, जो दर्शाता है कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक साथ मिलकर संगत में अपने अनुभवों को साझा किया और इस कुशल संगठन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रशंसा की। यह नगर कीर्तन न केवल धार्मिकता का प्रतीक था, बल्कि यह गुरु नानक देव जी के आदर्शों के प्रति समर्पण का भी प्रतीक था। इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थी और शास्त्री सभी को प्रेरणा मिलती है कि वे गुरु की शिक्षाओं का पालन करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रयासरत रहें।

इस प्रकार, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में आयोजित यह महान नगर कीर्तन न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि यह एक सामाजिक, सांस्कृतिक जश्न का भी हिस्सा बना, जो सिख समुदाय और अन्य समाज के सदस्यों को एक साथ लाने में सफल रहा। इस अवसर पर सभी ने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को आत्मसात किया और एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का प्रयत्न किया।