**अमृतसर में अकाली दल के मुद्दे पर बैठक:**
अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब पर अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल और बागी अकालियों के बीच चल रहे विवाद को लेकर बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पंथक विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने विचार-विमर्श किया। बैठक में शामिल लोगों ने अपने मौखिक और लिखित विचार प्रस्तुत किए। कुछ सदस्य, जो बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे, उन्होंने अपनी राय लिखित में भेजी थी।
बैठक में नेतृत्व परिवर्तन की विषय पर विभाजित विचार सामने आए, जहां कुछ सदस्यों ने इसकी आवश्यकता पर जोर दिया, तो वहीं अन्य ने इस पर असहमति जताई। इस बैठक के लिए कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन चर्चा के अनुसार लगभग 20 लोग इसमें शामिल होने वाले थे।
बैठक में एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सहित 7 प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया। अन्य प्रतिभागियों में एडवोकेट एचएस फूलका, हरसिमरन सिंह, डॉ. अमरजीत सिंह, इंजीं सर्बजोत सिंह सोहल, बीबी जसबीर कौर और चमकौर सिंह शामिल थे। सभी ने अपने विचार श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदारों के समक्ष रखे।
इस दौरान सिंह साहिबान ने कहा कि पंथ के विद्वानों और बुद्धिजीवियों के साथ वार्ता करने की परंपरा स्थापित है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में पंथक मुद्दों पर विभिन्न संगठनों और गुरुद्वारा कमेटियों के साथ चर्चाएं की जाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि इससे पंथ को नए दिशा में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बैठक में भाग लेने वाले विद्वानों ने पंथ में व्याप्त बिखराव और अकाली दल की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई। कई सदस्यों ने यह भी कहा कि यदि कोई निर्णय लेना है तो वह पंथ के भावनात्मक संदर्भ में होना चाहिए, अन्यथा स्थिति और भी जटिल हो जाएगी। हरसिमरन सिंह ने कहा कि अकाली दल जिस कठिनाई से गुजर रहा है, वह स्थिति उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।
इस बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि अकाली दल को आगे बढ़ाने के लिए एक सुसंगत और सामूहिक निर्णय लेने की आवश्यकता है, जिससे पंथक मुद्दों को निपटाया जा सके। यह सभी के लिए चुनौतीपूर्ण समय है, लेकिन विद्वानों का मानना है कि यदि सभी मिलकर काम करें तो स्थिति को सुधारना संभव है और पंथ की एकता को बनाए रखा जा सकता है।