कैबिनेट मंत्री महेंद्र भगत का कपूरथला दौरा: मंदिर दर्शन के बाद सरकार की सहयोग की घोषणा!

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फगवाड़ा के कपूरथला जिले में स्थित ऐतिहासिक शिरोमणि श्री विश्वकर्मा मंदिर में बुधवार को विश्वकर्मा पूजा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह मंदिर करीब 114 साल पुराना है और इसकी धार्मिक महत्वता के कारण यहां हर साल इस पूजा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है। इस कार्यक्रम में पंजाब के कैबिनेट मंत्री महेंद्र भगत ने हिस्सा लेते हुए पूजा में दीप जलाया और श्रद्धालुओं को विश्वकर्मा दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने इस अवसर पर भगवान विश्वकर्मा के बारे में बताया कि वे श्रम के देवता हैं और उनके द्वारा दर्शाए गए मार्ग आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।

मंत्री महेंद्र भगत ने इस मंदिर के द्वारा स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार उस मंदिर कमेटी का हरसंभव समर्थन देगी, जो सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने श्री विश्वकर्मा चैरिटेबल अस्पताल के बारे में जानकारी दी कि यहां प्रतिदिन 350 से अधिक मरीजों का उपचार किया जाता है और यह अस्पताल कोविड-19 के दौरान टीकाकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। उनके अनुसार, यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टिकोन से ही नहीं, बल्कि समाजसेवा में भी एक महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है।

महेंद्र भगत ने मंदिर समिति द्वारा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों की भी प्रशंसा की। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि उनकी सरकार इन कार्यों के लिए मंदिर कमेटी की मांगों को मुख्यमंत्री भगवंत मान के समक्ष प्रस्तुत करेगी, ताकि उन्हें शीघ्र पूरा किया जा सके। भगत साहब ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर सेवा कार्यों में संलग्न रहें और जरूरतमंदों की सहायता करें।

इस आयोजन में कई प्रमुख लोग शामिल हुए। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के वाइस चेयरमैन प्रेम कुमार, पूर्व मंत्री जोगिंदर सिंह मान, मंदिर कमेटी के उपाध्यक्ष गुरमुख सिंह नामधारी, और आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता हरनूर सिंह हरजी मान जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति से इस कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर मंत्रियों का सम्मान किया गया, जिससे समाज में उनकी सक्रियता और योगदान की पुष्टि हुई।

विश्वकर्मा पूजा महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक सेवाओं की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस तरह के आयोजनों से न केवल लोगों में एकता और सद्भावना बढ़ती है, बल्कि समाज में सेवा भावना का भी उत्थान होता है। इस प्रकार के धार्मिक उत्सवों के माध्यम से हम अपने सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन कर सकते हैं।