पंजाब के जगराओं के गांव रसूलपुर मल्ला में भाजपा में शामिल हुए पूर्व सरपंच और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के करीबी सहयोगी को एक व्यक्ति ने विदेश से धमकी भरा फोन किया है। फोन पर सुनने वाले ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर वह भाजपा का साथ नहीं छोड़ता है, तो उसे अपनी जान गवानी पड़ सकती है। इस घटना की जानकारी मिलने पर पीड़ित ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आरंभ की और दो संदिग्ध आरोपियों के खिलाफ थाना हठूर में मामला दर्ज किया है।
पुलिस द्वारा की गई जांच में पाया गया है कि आरोपियों की पहचान गुरप्रीत सिंह गोपी और हरविंदर सिंह भीमी के रूप में हुई है, जो रसूलपुर मल्ला के निवासी हैं। थाना हठूर के एएसआई मनोहर सिंह ने बताया कि भाजपा नेता गुरसिमरन सिंह ने शिकायत में बताया कि वह 2018 से 2024 तक गांव का सरपंच रहा है। उन्होंने मई 2024 में भाजपा में शामिल होकर जिले की टीम का उपाध्यक्ष पद भी संभाला। हाल में हुए पंचायत चुनावों में, जिन उम्मीदवारों ने भाजपा का समर्थन किया, उनमें से एक को सरपंच के रूप में चुना गया। इस दौरान उसके गांव के एक निवासी गुरप्रीत सिंह ने आस्ट्रेलिया से फोन कर धमकी देने की शुरुआत की।
गुरसिमरन सिंह ने कहा कि उसे बार-बार इस बात की चेतावनी दी गई कि अगर वह भाजपा से बाहर नहीं निकलता, तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। चुनाव के दिन उसने जब अपने बेटे को सरकारी काम से फोन पर बात करवाने के लिए कहा, तो गुरप्रीत ने उस पर दबाव डालते हुए कहा कि भाजपा छोड़ने की तैयारी करे या उस पर और उसके परिजनों पर खतरा मड़ जाएगा। इसके बाद, उन्होंने सन्यास का फैसला करते हुए आरोपियों की कॉल को ब्लॉक कर दिया।
पूर्व सरपंच ने यह भी बताया कि धमकी की बातचीत में हरविंदर सिंह का नाम शामिल था, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया। आरोपी ने हरविंदर के जरिए उनके फोन पर कॉन्फ्रेंस कॉल करके जान से मारने की धमकी दी। जब उन्होंने हरविंदर से बात करते हुए कहा कि यह व्यवहार अनुचित है, तो उसने यह स्पष्ट किया कि यह सब उसकी मंजूरी से किया गया है। पीड़ित के अनुसार, उस दिन के बाद से आरोपी ने लगातार उसे और उसके परिवार को मैसेज करके धमकियां देने का सिलसिला जारी रखा।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की और दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी है। यह मामला न केवल स्थानीय राजनीति में तनाव बढ़ाता है, बल्कि यह दर्शाता है कि राजनीतिक संगठनों के भीतर अपनी शक्ति के लिए किस हद तक जा सकते हैं। पुलिस मामले की गहन छानबीन कर रही है ताकि पीड़ित को जल्दी से न्याय मिल सके।