पंजाब के होशियारपुर में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के आगमन से पहले, अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष विजय सांपला ने आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने एक पत्रकार वार्ता के दौरान इस सरकार की किसानों के प्रति नकारात्मक रवैये की आलोचना की। सांपला ने बताया कि आम आदमी पार्टी ने जब सत्ता हासिल की, तब उन्होंने किसानों की भलाई को अपनी प्राथमिकता बताया, लेकिन अब पंजाब के किसान बेहद चिंतित और परेशान हैं। उनका कहना है कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
सांपला ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता भले ही लुधियाना से जम्मू कश्मीर तक हेलीकॉप्टर में प्रचार प्रसार के लिए जा सकते हैं, लेकिन वे भवानीगढ़ जैसी जगह पर जाने से कतराते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2016 में चुनाव प्रचार के दौरान, जहां एक किसान ने आत्महत्या की थी, वहां केजरीवाल और भगवंत मान ने प्रचार किया था, लेकिन इससे प्रभावित परिवार का हाल जानने की आवश्यकता नहीं समझी। यह उनकी राजनीतिक संवेदनहीनता का एक उदाहरण है, जहां केवल जनसमर्थन की चिंता है, जबकि असली समस्या से मुंह मोड़ा जा रहा है।
सांपला ने यह भी उजागर किया कि हाल ही में लुधियाना में केजरीवाल और मान दोनों मौजूद थे, लेकिन एक किसान के आत्महत्या की घटना पर उनकी चुप्पी बेहद ही चिंताजनक है। इस तरह के घटनाक्रम से साफ होता है कि मौजूदा सरकार के नुमाइندों की प्राथमिकता केवल राजनीति करना और चुनावी लाभ उठाना है, न कि किसानों की समस्याओं का समाधान करना। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसानों का अनदेखी किया जाना बेहद शर्मनाक है और यह दर्शाता है कि आम आदमी पार्टी कृषि मुद्दों को हल करने के लिए कितनी गंभीर है।
विजय सांपला ने स्पष्ट किया कि पंजाब की जनता अब इन झूठे वादों और प्रचार से थक गई है। आम आदमी पार्टी को अपने चुनावी वादों को पूरा करने और किसानों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। सांपला की बातों से यह प्रतीत होता है कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करना एक गंभीर चुनौती है, जिससे निपटना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
युवाओं और किसानों के लिए बेहतर भविष्य देखने के लिए जरूरी है कि सरकार वास्तविकता के धरातल पर कदम उठाए और न केवल चुनावी रैलियों में दिखावे के लिए उपस्थित रहे। पंजाबी जनता की मांग है कि सरकार अपनी नीतियों में बदलाव करे और किसानों के उत्थान की दिशा में सार्थक कदम उठाए, ताकि वे अपने जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।