गुरदासपुर में माइनिंग अधिकारी पर पिस्टल तानकर जान से मारने की धमकी, टिप्पर ड्राइवर की हरकत!

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गुरदासपुर में माइनिंग विभाग के एक्सईएन दिलप्रीत सिंह के साथ एक गंभीर घटना घटी है, जब उन्होंने आधी रात को अवैध रेत खनन का पीछा किया। मिली जानकारी के अनुसार, जब दिलप्रीत सिंह ने दो बिना नंबर प्लेट वाले टिप्परों को रोकने का प्रयास किया, तो टिप्पर के चालकों ने उनकी कार को साइड मारी और तेजी से फरार हो गए। यह मामला तब और तूल पकड़ गया जब डंप मालिक हरजीत सिंह ने कथित रूप से एक्सईएन को पिस्तौल दिखाते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। घटना को लेकर एक्सईएन ने तुरंत पुलिस को सूचित किया, लेकिन उन पर पुलिस के सामने ही हमला किया गया।

दिलप्रीत सिंह ने बताया कि वह रात के लगभग 12:30 बजे रविदास चौक पर ड्यूटी पर थे जब उन्होंने अबल खैर की ओर से आ रहे रेत से भरे दो टिप्परों को देखा। इन टिप्परों को रोकने के प्रयास के दौरान, एक टिप्पर चालक ने उनकी कार को साइड मारते हुए तेज गति से भागने की कोशिश की। जिसके बाद, एक्सईएन और उनकी टीम ने टिप्परों का पीछा किया, लेकिन वे पंडोरी महंता के पास खालसा एंड कंपनी नामक डंप पर रुके, जहां चालक वहां से भाग निकला।

इस घटना का गंभीर पक्ष यह है कि एक्सईएन दिलप्रीत सिंह ने उच्च अधिकारियों और दीपू कमिश्नर गुरदासपुर को जानकारी दी, जिससे मामला और संजीदा हो गया। पुलिस ने हरजीत सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर सरकारी अधिकारी को धमकी देने और उनके साथ हिंसा करने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत भी मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की है।

गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर उमा शंकर गुप्ता ने तुरंत एसएसपी को इस मामले की जानकारी दी, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। ऐसे मामलों में जहां सरकारी अधिकारियों को खुलेआम धमकाया जाता है, यह समाज पर बुरा प्रभाव डालता है। इस घटना ने खनन विभाग के कार्यों में बाधा डालने की कोशिश की है, जो अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सतर्क है।

इस घटना से स्पष्ट होता है कि खनन-अंचल में अवैध गतिविधियाँ रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पुलिस और प्रशासन को अब इस गंभीर विषय पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। इस घटना ने न केवल खनन अधिकारियों की सुरक्षा को सवाल में डाला है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि अवैध खनन पर काबू पाने के लिए प्रशासन को और अधिक सक्रियता से काम करने की जरूरत है।