पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के एक मामले में बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के पास भेजने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने राष्ट्रपति के सचिव को निर्देश दिया है कि उन्हें यह याचिका जल्द से जल्द, विशेषकर अगले दो हफ्तों में, राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत करें। उल्लेखनीय है कि राजोआना को 1995 में बेअंत सिंह की हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई थी। यह हत्या 31 अगस्त 1995 को हुई थी, जब राजोआना और दिलावर सिंह ने मिलकर एक मानव बम के जरिए बेअंत सिंह पर हमला किया था। दिलावर ने मानव बम की भूमिका निभाई थी, और यदि वह असफल होता, तो राजोआना की तरफ से अगला हमला होना था।
हाल ही में न्यायालय की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई, प्रशांत कुमार मिश्रा और केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार से मामले में जवाब मांगा था। केंद्र सरकार ने उचित जवाब प्रस्तुत किया है, जिसके बाद कोर्ट ने राजोआना की याचिका को राष्ट्रपति के पास भेजने का निर्णय लिया। राजोआना ने अपनी याचिका में मांग की है कि उनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने अदालत में यह भी दलील दी है कि भारत सरकार उनके मामले में निर्णय लेने में काफी समय लगा रही है।
राजोआना के वकील मुकुल रोहतगी ने इस मामले में देरी को गंभीर बताया और कहा कि राजोआना ने पिछले 29 वर्षों से जेल में बिताए हैं। उन्हें मूल रूप से 1996 में बम विस्फोट के मामले में दोषी ठहराया गया था। रोहतगी ने कहा कि इस तरह की लंबी हिरासत एक गंभीर चिंता का विषय है। इस पर न्यायमूर्ति गवई ने पंजाब की तरफ से तर्क देने वाले वकील से यह पूछा कि क्या जारी किए गए नोटिस के खिलाफ कोई जवाब दाखिल किया गया है। हालांकि, वकील ने रिपोर्ट दाखिल करने में असमर्थता जताई, जिस पर गवई ने उन्हें दो सप्ताह का समय देने की सहमति दी।
इस बीच, पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया ने चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा के लिए जमीन आवंटन के संबंध में भी एक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा के लिए कोई भी जमीन आवंटित नहीं की गई है। कटारिया ने कहा कि उनके प्रस्ताव पर विचार विमर्श चल रहा है और जब तक कोई निर्णय नहीं होता, तब तक इस पर कोई ठोस बात नहीं की जा सकती। यह हालिया घटनाक्रम चंडीगढ़ में चल रहे भूमि विवाद के बीच सामने आया है, जहाँ हरियाणा और पंजाब के नेता भूमि आवंटन को लेकर आपस में चर्चा कर रहे हैं।
इन सभी घटनाक्रमों ने एक बार फिर से पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जहाँ कानून और व्यवस्था के मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक संवाद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। राजोआना की दया याचिका और राज्य के भू-आवंटन विवाद से स्पष्ट है कि पंजाब की राजनीति अभी भी जटिलताएँ जूझ रही है।