चंडीगढ़ PGI वेतन विवाद: HC ने दिए समाधान के लिए 2 महीने, हड़ताल पर लगी रोक!

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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पीजीआई और आउटसोर्स कर्मियों के बीच चल रहे वेतन और अन्य विवादों को सुलझाने के लिए एक नई दिशा दी है। अदालत ने सहायक श्रमायुक्त को मध्यस्थता का कार्यभार सौंपते हुए विवाद खत्म करने के लिए दो महीने का समय दिया है। न्यायालय ने इसके साथ यह भी स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि आदेशों का उल्लंघन किया गया तो इसे अदालत की अवमानना के रूप में लिया जाएगा।

पीजीआई के सफाई कर्मचारियों, जिनमें आउटसोर्स कर्मी भी शामिल हैं, ने समान वेतन, स्वास्थ्य लाभ और अन्य भत्तों की मांग की है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से इन सुविधाओं से वंचित हैं और यह उनकी बुनियादी जरूरतें हैं। इसके अलावा, पीजीआई प्रशासन का कहना है कि ये कर्मचारी यूनियन के नेताओं के द्वारा हड़ताल के लिए भड़काए जा रहे हैं, जिससे संस्थान के कामकाज में गंभीर बाधाएं आ रही हैं। पीजीआई ने यह चेतावनी दी है कि उनके द्वारा दी गई सेवाएं आवश्यक श्रेणी में आती हैं, जिसके तहत यूनियनों का हस्तक्षेप अवैध है और यह पूर्वी पंजाब आवश्यक सेवा (रखरखाव) अधिनियम, 1947 के खिलाफ है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक निश्चित समय सीमा दी है ताकि वे अपने विवाद को सुलझा सकें। सहायक श्रमायुक्त को निर्देश दिया गया है कि वह इस मध्यस्थता प्रक्रिया में सभी पक्षों के सहयोग को सुनिश्चित कराएं। इस मामले में केंद्र सरकार को भी निर्देशित किया गया है कि वह कर्मियों की वास्तविक शिकायतों का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाए। इसके पिछे भी पीजीआई प्रशासन और सभी कर्मचारियों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए पहले भी एक समिति का गठन किया गया था, लेकिन उसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अनुशासन बनाए रखना दोनों पक्षों की مشترक जिम्मेदारी है। ऐसे में, हर किसी को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहना होगा। अदालत की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान हो सकेगा और संस्थान में कार्य वातावरण सामान्य हो जाएगा। दोनों पक्षों को यह समझना होगा कि बातचीत और सहमति के माध्यम से ही समस्या का समाधान संभव है, जो अंततः सभी के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

इस मामले में अब सभी की निगाहें सामंजस्यपूर्ण समाधान की ओर हैं, खासकर उन कर्मचारियों की जो लंबे समय से अपनी उचित मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना होगा कि नियत समय में क्या दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से एक संतोषजनक समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।