कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में हिंदू मंदिर में हुए उपद्रव के मामलों को लेकर अब हिंदू समुदाय ने अपील की है। भारतीय मूल के वकील विनीत जिंदल ने कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने न्यायमूर्ति रिचर्ड वैगनर के सामने 3 नवंबर को हिंदू सभा मंदिर पर हुए हमले की जांच की मांग की है। इस घटना में पील पुलिस के कुछ अधिकारियों और खालिस्तान समर्थक संगठनों के शामिल होने का आरोप लगाया गया है। जिंदल ने याचिका में अपराधियों को दंडित करने और कनाडा में हिंदू पूजा स्थलों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की मांग की है, साथ ही सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया है।
विनीत जिंदल ने अपने बयान में कहा कि उन्हें कनाडाई न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उन्होंने उम्मीद जताई कि हिंदू समुदाय को उचित सुरक्षा प्रदान की जाएगी जो उनका अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने न्यायालय से खालिस्तान समर्थकों द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शनों पर सख्त रोक लगाने की भी मांग की है। हाल के वर्षों में, कनाडा के विभिन्न हिस्सों में हिंदू मंदिरों पर हमले किए गए हैं, जिससे भारतीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है।
इस हमले के संदर्भ में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे हमले भारत के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते और कनाडा सरकार से उचित कार्रवाई की अपेक्षा की। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कनाडा में कायरतापूर्ण तरीके से अपने डिप्लोमैट्स को डराने की कोशिशें निंदनीय हैं। इसके अलावा, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी इस घटना के लिए निंदा की और कहा कि हर कनाडाई को अपने धर्म का पालन स्वतंत्र और सुरक्षित तरीके से करने का अधिकार है।
हालांकि, भारत और कनाडा के रिश्ते पिछले एक साल से खराब हो रहे हैं, खासकर खालिस्तानी समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद, जिसके बारे में ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों पर आरोप लगाए थे। इसके चलते, भारत ने अपने छह राजनयिकों को वापस बुला लिया और भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि ट्रूडो सरकार तथ्यों के बिना भारत को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। ऐसी स्थिति में, भारतीय सरकार ने कहा कि कनाडा में चरमपंथियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और कनाडा सरकार को इन पर काबू पाने की आवश्यकता है।
हाल की घटनाओं से यह स्पष्ट है कि कनाडा में हिंदू समुदाय के लिए सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चूका है। ऐसे में, अदालत में दायर की गई याचिका और राजनैतिक बयानबाज़ी ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कनाडा का न्यायपालिका और सरकार इस मामले को कैसे संभालती है और हिंदू समाज को किस तरह की सुरक्षा और न्याय मिलता है।