आज बरनाला में कृषि विभाग और किसान कल्याण विभाग की विशेष टीमों द्वारा दुकानों पर डीएपी की उपलब्धता को लेकर निरीक्षण किया गया। पिछले कुछ समय से जिले में खाद की कमी के कारण किसान परेशान थे, इसी ध्यान में रखते हुए यह छापेमारी की गई। टीमों ने खाद, बीज और कीटनाशकों की दुकानों पर जाकर उनके स्टॉक और रिकॉर्ड की गहन जांच की। यह सुनिश्चित किया गया कि सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो और किसानों को उनकी जरूरत अनुसार खाद समय पर मिल सके।
इस छापेमारी के दौरान संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. नरिंदरपाल सिंह बनीपाल ने किसानों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि वे खाद के साथ किसी भी प्रकार की टैगिंग न करें। उनके अनुसार, यह एक गंभीर समस्या है जो किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। डॉ. बनीपाल ने सभी डीलरों को भी निर्देश दिए कि वे खाद के स्टॉक और दरों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉक ब्रॉड का अनिवार्य रूप से उपयोग करें, ताकि खरीदारों को सही जानकारी मिल सके।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि बरनाला में डीएपी के साथ-साथ ऑप्शनल फॉस्फेट खाद जैसे सिंगल सुपर फॉस्फेट, 12:32:16 और ट्रिपल सुपर फॉस्फेट भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य किसानों को गेहूं की बुआई में कोई कठिनाई न हो। मुख्य कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की कि यदि उन्हें किसी प्रकार के खाद की टैगिंग के मामले की जानकारी मिले, तो तुरंत मुख्य कृषि अधिकारी के कार्यालय में इसकी शिकायत करें। इससे संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी।
अधिकारियों ने आज किए गए निरीक्षण में बताया कि सभी दुकानों पर खाद और उनके रिकॉर्ड सही पाए गए हैं, जिससे यह आश्वासन मिलता है कि किसानों को जल्द ही आवश्यक सामग्री मिलेगी। किसान इस बात से आश्वस्त हैं कि अब उन्हें अपनी जरूरत की खाद पहले से अधिक आसानी से उपलब्ध होगी। इससे न केवल उनकी कृषि गतिविधियों में सुगमता आएगी, बल्कि उन्हें बेहतर उत्पादन हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
इस प्रकार, बरनाला में कृषि विभाग और किसान कल्याण विभाग की सक्रियता से खाद की किल्लत के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए ये प्रयास विगत समय की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में किसानों को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।