शिरोमणि अकाली दल ने आज (सोमवार) पंजाब में धान की खरीद को लेकर किसानों की समस्याओं, डीएपी खाद की कमी और कालाबाजारी के खिलाफ डीसी कार्यालयों का घेराव किया है। इस दौरान उन्होंने पंजाब और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी के सीनियर नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है और किसानों को गंभीर संकट में छोड़ दिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री गुलजार सिंह रणिके ने अमृतसर में डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है, जिसके चलते वे परेशान हैं।
रणिके ने कहा कि पिछले दो महीनों में जो कार्य होने चाहिए थे, उन पर सरकार का ध्यान नहीं गया, और अब किसान धान की खरीद में धांधली का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीएपी खाद की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है, जो किसानों की कठिनाइयों को बढ़ा रहा है। उनका स्पष्ट कहना है कि पंजाब के किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है और सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उनका यह भी आरोप है कि किसानों की खरीद में घोटाले की स्थिति बनी हुई है, जिससे स्थिति और भी विकराल हो रही है।
वहीं, मोहाली में विधायक कुलजीत सिंह अकाली दल के प्रदर्शन में पहुंचे और किसानों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों की मांगें उचित हैं और सरकार उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है। कुलजीत ने कहा कि जल्दी ही इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पंजाब में किसानों की मांगों को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जो अकाली दल के कार्यकारी प्रधान बलविंदर सिंह भुंदर के नेतृत्व में चल रहे हैं। प्रदर्शन में किसानों की विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जा रहा है, और अगर सरकार ने समय रहते समाधान नहीं किया, तो अकाली दल अपने विरोध को और तेज करने का मन बना रहा है।
शिरोमणि अकाली दल के नेताओं का कहना है कि इस प्रकार के प्रदर्शन पूरे पंजाब में किए जा रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों के अधिकारों और मुद्दों को उजागर करना है। उनका मानना है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पंजाब के विभिन्न इलाकों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से संबंधित तस्वीरें भी इस आंदोलन की तीव्रता को दर्शाती हैं, जो यह इंगित करती हैं कि किसानों के मुद्दों पर ध्यान देने का समय आ गया है।
इस प्रदर्शनी ने पंजाब में राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि किसान अपनी समस्याओं को लेकर एकजुट हैं। उन समस्याओं के समाधान की दिशा में सरकार की कार्रवाई का यह प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण संकेत बना हुआ है। आगामी दिनों में किसान संगठनों द्वारा होने वाले और प्रदर्शनों के कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है, जहां उनकी समस्याओं को लेकर और भी अधिक दबाव बनाया जाएगा। पंजाब का यह आंदोलन न केवल किसानों की समस्याओं का रोना है, बल्कि यह समाज के अन्य वर्गों को भी एकजुट करने का प्रयास प्रतीत हो रहा है।