अबोहर में दूसरी कक्षा के बच्चे की पिटाई, अस्पताल में भर्ती, प्रिंसिपल की अनदेखी!

Share

अबोहर के लाइन पार क्षेत्र में एक स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र के साथ एक महिला शिक्षिका द्वारा पिटाई करने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना के बाद बच्चे के परिवार ने उसे अस्पताल में भर्ती कराते हुए आरोपी शिक्षिका के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामला थाना नंबर 2 के पुलिस विभाग में दर्ज कर लिया गया है, और पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले की जांच में जुट गया है।

रामदेव नगरी के निवासी संजय धोलिया ने कहा कि उनका लगभग 7 वर्षीय बेटा जगदेव जो कि स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ता है, शनिवार को स्कूल में पानी पीने गया था। जब वह थोड़ी देर बाद वापस नहीं आया, तो शिक्षिका ने उसके साथ मारपीट की। छुट्टी के बाद जब जगदेव घर पहुंचा, तो उसने अपने परिवार वालों को इस घटना के बारे में बताया, जिससे परिवार में चिंता का माहौल पैदा हो गया। परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस से शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

जब इस मामले पर स्कूल की मुख्य शिक्षिका से बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि शनिवार को बच्चा दोपहर 2 बजे छुट्टी के बाद स्कूल से घर की ओर रवाना हुआ था, लेकिन वह 3 बजे अपने घर पहुंचा। इससे यह जाहिर होता है कि वह शायद रास्ते में खेलते या दौड़ते हुए चोटिल हुआ हो सकता है। शिक्षिका ने स्पष्ट किया कि वे बच्चे के हाथ और पैर पर लगी चोटों को मारपीट के निशान नहीं मानतीं।

इस विवाद को सुलझाने के लिए वार्ड पार्षद ने भी हस्तक्षेप किया है और दोनों पक्षों के लोग पार्षद कार्यालय में एकत्रित हुए। पार्षद ने मामले को सुलझाने के लिए प्रयासरत हैं, ताकि बच्चों और शिक्षकों के बीच इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, पुलिस की ओर से मामले की जांच जारी है, और सच्चाई का पता लगाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

इस प्रकार, यह घटना एक बार फिर शिक्षकों और छात्रों के बीच के संबंधों की गंभीरता को सामने रखती है। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को न केवल शिक्षा दें, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सशक्त वातावरण में भी बढ़ने के लिए प्रेरित करें। सभी की नजर अब इस मामले पर है, जबकि पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस पर अपनी उचित कार्रवाई करने में जुटा हुआ है। समाज में इस तरह की घटनाओं का होना बच्चों के मानसिक विकास और सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगाता है, और इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।