अबोहर में खाद की रैक पर बवाल: किसान नेताओं की गिद्दडबाहा भेजने पर तीखी प्रतिक्रिया!

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अबोहर में आज श्रीगंगानगर रोड पर स्थित रेलवे के मालगोदाम में एक बड़ा हंगामा देखने को मिला, जब वहां के किसानों ने गिद्दडबाहा के कुछ अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह हालात तब उत्पन्न हुए जब अधिकारियों ने अबोहर क्षेत्र के किसानों के लिए लाई गई आईडीएपी खाद को गिद्दडबाहा भेजने का प्रयास किया। गुस्साए किसानों का कहना है कि वे किसी भी हालत में एक भी कट्टा गीदडबाहा नहीं जाने देंगे। किसानों के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन के दौरान, उन्होंने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ भी अपनी नाराजगी व्यक्त की।

किसान नेता सुखमंदर सिंह ने आरोप लगाया कि पहले अबोहर के अनाज मंडियों में धान लाने वाले किसानों के साथ बेइमानी हुई थी, जब उनके धान की खरीदारी के समय भारी कटौती की गई थी। अब जब किसानों को कनक की बुआई के लिए डीएपी खाद की आवश्यकता है, तो सरकार ने उस खाद को गिद्दडबाहा भेजने का फैसला लिया है। उनका मानना है कि इसका उद्देश्य गिद्दडबाहा के वोटरों को खुश करना और वहां के उपचुनाव को जीतना है। उन्होंने इस बेतुके फैसले के खिलाफ आवाज उठाते हुए चेतावनी दी है कि अगर समय पर किसानों को खाद नहीं मिली, तो वे गेहूं की बुआई कैसे करेंगे।

सुखजिंदर राजन ने भी इस मामले में कहा कि डीएपी खाद के वितरण में भारी घपलेबाजी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इस समस्या पर आम आदमी पार्टी के किसी नेता की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है। सभी नेता चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि गिद्दडबाहा से खाद लेने आए अधिकारियों ने जानकारी दी कि सीएम मान के निर्देश पर यह खाद गिद्दडबाहा भेजी जा रही है। लेकिन किसान इस निर्णय को स्वीकार नहीं कर रहे और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

किसान नेता बबल बुटर ने बताया कि जैसे ही उन्हें गिद्दडबाहा में डीएपी खाद भेजे जाने की सूचना मिली, वे तुरंत रैक पर पहुंचे और वहां मौजूद ट्रकों की बिल्टी की जांच की। उन्होंने पाया कि अधिकांश ट्रकों की बिल्टी गिद्दडबाहा क्षेत्र के गांवों की थी, जबकि खाद वास्तव में अबोहर और बल्लूआना के लिए आई थी। वे स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अबोहर की डीएपी खाद को किसी भी कीमत पर नहीं जाने देने वाले हैं।

इस बीच, मार्केफेड के अधिकारियों ने जानकारी दी कि कुछ खाद इसकी आवश्यकता वाली जगहों के लिए भेजी जा रही है, जबकि कुछ प्राइवेट खाद भी गिद्दडबाहा जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि यदि उच्चाधिकारियों का आदेश मिलेगा कि सभी खाद अबोहर में ही उतारी जाए, तो उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस परिस्थिति ने अबोहर के किसानों को अपने हक के लिए और अधिक संगठित होकर लड़ने के लिए प्रेरित किया है। उनकी एकता और दृढ़ता से यह स्पष्ट होता है कि वे अपने हकों को बचाने के लिए पूरी तरह से तत्पर हैं।