अबोहर में प्रॉपर्टी विवाद ने किया रौद्र रूप, पिता-पुत्र की झड़प से चार घायल!

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अबोहर के चंडीगढ़ मोहल्ले में संपत्ति के विवाद के चलते एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें पिता-पुत्र ने एक दूसरे पर हमला कर चोटिल कर दिया। इस विवाद में पीड़िता की मां भी घायल हुईं, जिन्होंने अपने बेटे और बहू पर आरोप लगाया कि वे उनकी संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं और उन पर शारीरिक हिंसा भी करते हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

72 वर्षीय कंचनलता ने बताया कि उनके बेटे और बहू उनके मकान में रहते हैं, लेकिन वे न तो उनकी देखभाल करते हैं और न ही उन्हें खाने-पीने की व्यवस्था करते हैं। उनके पोते लवप्रीत और उनकी पत्नी ही उनकी देखभाल करते हैं। कंचनलता ने कहा कि उनके बेटे के साथ इस समय कानूनी विवाद चल रहा है, जिसकी सुनवाई 29 तारीख को होनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आज वह अकेली थीं, तो उनके बेटे और बहू ने उनके कमरे में घुसकर उन पर हमला किया। बेटे ने उन्हें सिर पर ईंट मारा, जिससे वह बेहोश हो गईं। जब उनके पोते लवप्रीत ने इस घटना की जानकारी लेने के लिए अपने पिता की दुकान पर गए, तो उन्हें भी वहां से मजबूरन बाहर निकाला गया।

वहीं, दूसरे पक्ष के गुरप्रीत और उनकी पत्नी मनजीत कौर ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को उसकी दादी, कंचनलता, से मिलकर मकान से निकालने की साजिश की जा रही है। इसी कारण से लवप्रीत उनकी दुकान पर आया और गाली-गालौज करना शुरू कर दिया। जब उन्होंने उसे रोका, तो उसने दुकान बंद कर दी और कुर्सी की पाइप से उन्हें बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया।

यह घटना दर्शाती है कि परिवार में संपत्ति के मामले में मतभेद कितने खतरनाक हो सकते हैं। कभी-कभी छोटे मुद्दे भी बड़े विवादों का कारण बन सकते हैं, जो अंततः परिवार के सदस्यों के बीच खींचतान और हिंसा का रूप ले लेते हैं। यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक झगड़ा नहीं, बल्कि यह समाज में संपत्ति के प्रति बढ़ते लालच और उसके परिणामस्वरूप होने वाली हिंसा का एक उदाहरण है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी परिवारिक किस्म के विवाद देखने को मिलते हैं, जिसमें संपत्ति के लिए भाई-भाई और पिता-पुत्र तक एक दूसरे से लड़ाई करते हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए न केवल कानूनी मदद की आवश्यकता है, बल्कि परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और समझ विकसित करनी होगी, ताकि परिवार की एकता बनी रहे और हिंसा के इस चक्र से बचा जा सके। इस मामले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन को भी आवश्य ध्यान देना होगा, ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।