स्पोर्ट्स रिसर्च पर खुलासा: जानिए कैसे यूनिवर्सिटी का सिस्टम बना अंतरराष्ट्रीय मॉडल!

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**अमृतसर में ब्रिटिश हाई कमिशनर का दौरा, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की की सराहना**

अमृतसर: ब्रिटेन की हाई कमिशनर लिंडी कैमरन ने बुधवार को अमृतसर का दौरा किया, जहां उन्होंने अपनी टीम के साथ गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी का निरीक्षण किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उनके साथ डिप्टी हाई कमिश्नर कैरोलीन रोवेट, डिप्टी हेड अमन ग्रेवाल, कम्यूनिकेशन हेड डेविड रसल और डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर लक्ष्य सागर भी उपस्थित थे। इस दौरे के दौरान, यूनिवर्सिटी के डीन प्रोफेसर डॉ. पलविंदर सिंह ने उनकी अगवानी फूलों के गुलदस्ते और किताबों के उपहार के माध्यम से की, जिससे दिखता है कि भारतीय संस्कृति में मेहमानों का स्वागत कितनी अहमियत रखता है।

कैमरन ने यूनिवर्सिटी के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि पर्यावरण, अकादमिक प्रदर्शन, खेल और शोध के क्षेत्र में की गई उपलब्धियों पर गहराई से जानकारी ली। उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया इसे दर्शाती है कि वे भारतीय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे विकासों से कितनी प्रभावित हुई हैं। इसके बाद, कैमरन ने यूनिवर्सिटी अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जहां उन्होंने यहाँ की शिक्षा प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता की सराहना की। इस बैठक में शिक्षा के आदान-प्रदान के मुद्दे पर भी चर्चा की गई, जो कि भारत और ब्रिटेन के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने में मददगार हो सकता है।

यूनिवर्सिटी की तरफ से इस बैठक में कई प्रमुख शख्सियतें मौजूद थीं, जिनमें एजुकेशन विभाग के मुखी प्रोफेसर डॉ. अमित कौट्स और प्रोफेसर इंचार्ज पब्लिक रिलेशन डॉ. वसुधा साम्बियाल शामिल थे। बैठक के दौरान, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी पर भी विचार-विमर्श किए गए, जो भविष्य में दोनो देशों के विश्वविद्यालयों के बीच ज्ञान और तकनीकी आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा।

ब्रिटिश हाई कमिश्नर का इस तरह का दौरा दर्शाता है कि न केवल अमृतसर बल्कि समूचे भारत में उच्च शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और स्तर को पहचाना जा रहा है। यह सहायता और सहयोग भारत और ब्रिटेन के बीच शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विकास का संकेत है। इससे दोनों देशों के छात्रों को लाभ मिलने की सम्भावना है और वे नई-नई अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।

निर्णय लेने की इस प्रक्रिया में, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ब्रिटेन की विशेषज्ञता और भारत की विविधता का संयोजन नए अवसरों की ओर ले जा सकता है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि होगी, बल्कि छात्रों के लिए समृद्ध भविष्य की तैयारी में भी मदद मिलेगी। इस तरह के दौरे वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।