पंजाब में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता विकास बग्गा की हत्या के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के नेता वधावा सिंह उर्फ बब्बर और अन्य पांच आतंकवादियों के नाम शामिल हैं। आरोप है कि बब्बर और उसके साथियों ने विकास बग्गा की हत्या के लिए हथियार, गोला-बारूद और धन की व्यवस्था की थी। विकास बग्गा की हत्या 13 अप्रैल 2024 को रूपनगर के नंगल क्षेत्र में हुई थी, जहां आतंकवादियों ने उन्हें गोलियों से भून दिया था।
एनआईए की चार्जशीट में मुख्य आरोपी बब्बर के अलावा दो अन्य फरार आरोपियों का भी नाम है, जबकि तीन आरोपियों को इस हत्याकांड का मुख्य अपराधी माना गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से दो की पहचान शूटर मनदीप कुमार (मंगली) और सुरिंदर कुमार (रीका) के रूप में की गई है, जो नवांशहर जिले के निवासी हैं। एनआईए ने इन आरोपियों के खिलाफ यूएपीए और आर्म्स एक्ट समेत कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि विकास बग्गा की हत्या के पीछे खालिस्तानी आतंकवादियों का हाथ है। 13 अप्रैल 2024 को जब बग्गा अपनी हलवाई की दुकान में थे, तभी उन पर गोलियां चलीं। इसके बाद 9 मई 2024 को इस मामले की जांच एनआईए द्वारा ली गई। एनआईए ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के साथ मिलकर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए व्यापक प्रयास किए। जांच के दौरान पता चला कि विदेश में बैठे खालिस्तानी आतंकियों ने इस हत्या की साजिश की थी, जिसके लिए मध्य प्रदेश से अवैध हथियारों की खरीदी की गई थी।
एक अन्य जानकारी यह सामने आई है कि आरोपी धर्मेद्र ने मध्य प्रदेश से हथियार और गोला-बारूद खरीदे थे, जिसका उपयोग शूटरों द्वारा किया गया। विदेश में रहने वाले खालिस्तानी आतंकवादी हरविंदर कुमार उर्फ सोनू ने इन हथियारों की सप्लाई का आदेश दिया था। गिरफ्तार किए गए शूटर मनदीप कुमार और सुरिंदर कुमार को 16 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वे न्यायिक हिरासत में हैं।
एनआईए ने अब बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के दो अन्य गुर्गों की भी तलाश शुरू कर दी है, जिनमें हरजीत सिंह उर्फ लाडी (नवांशहर) और कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू (यमुनानगर) शामिल हैं। इन दोनों के लिए एनआईए ने 10-10 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है। इस प्रकार, यह मामला न केवल विकास बग्गा की हत्या के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को पकड़ने का प्रयास है, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पंजाब में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है।