पंजाब नगर निगम चुनाव पुराने वार्ड विभाजन पर: हाईकोर्ट का 15 दिन में प्रक्रिया शुरू करने का आदेश!

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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह उन सभी नगर पालिकाओं और नगर निगमों में जल्द चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करे, जहां चुनाव लंबे समय से अधूरे हैं। अदालत ने शनिवार को दिए अपने आदेश में इस बात की पुष्टि की कि राज्य में बिना परिसीमन के चुनाव कराने के लिए सरकार को 15 दिन का समय दिया जा रहा है। इस आदेश में खासतौर पर फगवाड़ा, अमृतसर, पटियाला, जालंधर, लुधियाना जैसे नगर निगमों एवं 42 नगर परिषदों का उल्लेख किया गया है, जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है लेकिन चुनाव अब तक नहीं हो सके हैं।

उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि चुनावों के आयोजन में कोई भी देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि बिना नए परिसीमन की आवश्यकता के चुनावी कार्यक्रमों का ऐलान किया जाना चाहिए। यह आदेश तब आया जब याचिका में यह मुद्दा उठाया गया कि नगर पालिकाओं, नगर परिषदों, नगर निगमों और नगर पंचायतों के चुनाव लंबित हैं। पंजाब के महाधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव कराने के लिए पहले घर-घर सर्वेक्षण, कच्चा नक्शा तैयार करना एवं परिसीमन बोर्ड का गठन करना आवश्यक है।

महाधिवक्ता ने यह भी उल्लेख किया कि 47 नगर पालिकाओं में से 44 के लिए परिसीमन बोर्ड का गठन किया जा चुका है, जबकि शेष तीन नगर पालिकाओं में प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। उन्होंने वार्डों के परिसीमन के लिए 16 सप्ताह की अवधि की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर 2023 को परिसीमन का पिछले निर्णय रद्द होने के बाद नए परिसीमन की आवश्यकता उत्पन्न हुई है। हालांकि अदालत ने समझते हुए राज्य को बिना परिसीमन प्रक्रिया के चुनाव कराने के आदेश जारी किए हैं।

इस मामले में मालेरकोटला के निवासी बेअंत सिंह ने जनहित याचिका दायर करते हुए उच्च न्यायालय को बताया कि पंजाब की 42 नगर परिषदों का कार्यकाल कई महीनों पहले समाप्त हो चुका है। इनमें से कई का कार्यकाल समाप्त होने के बाद दो साल से अधिक समय हो चुका है, जिसके चलते विकास कार्य ठप हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दिसंबर 2022 में अधिकांश नगर परिषदों का कार्यकाल खत्म हो गया था और इस बारे में 1 अगस्त 2023 को चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन अब तक चुनाव नहीं हुए हैं।

याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 5 जुलाई को चुनाव कराने के लिए सरकार को कानूनी नोटिस भी भेजा था, लेकिन अब तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। इस कारण उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया। अब इस आदेश के बाद पंजाब सरकार को जल्द चुनाव कराने की दिशा में कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है, ताकि लंबित विकास कार्यों की गति फिर से बहाल हो सके।