शैलर हड़ताल ने बिगाड़े हालात: SSP नवनीत सिंह का जगराओं मंडी का दौरा!

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जगराओं की अनाज मंडी में पिछले तीन दिनों से धान की फसल की खरीदारी पर संकट छाया हुआ है। डीएसपी और एसएचओ सहित प्रशासन के अधिकारी किसानों और आढ़तियों के बीच हालात का जायजा लेने पहुंचे। किसानों का कहना है कि धान के सम्पूर्ण सीजन के 23 दिन बीत जाने के बावजूद मंडियों में स्थिति बेहद खराब है। खुली जगह पर 10 लाख से ज्यादा धान की बोरियां पड़ी हुई हैं, जो लगातार खराब हो रही हैं। आढ़तियों के प्रधान कन्हैया लाल बांका ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंडी में अब किसानों की फसल उतारने के लिए भी जगह नहीं बची है।

स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि जगराओं क्षेत्र के 100 से अधिक शैलर मालिकों ने हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल के चलते धान की खरीदारी रुक गई है, जिससे किसान और आढ़ती दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। एसएसपी नवनीत सिंह बैंस ने इस गंभीर मुद्दे को देखते हुए मंडी का दौरा किया, जहां उन्होंने आढ़तियों और किसानों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उनके साथ पुलिस का वीडियोग्राफर भी मौजूद था, जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस दौरे का रिपोर्ट सरकार को भेजा जाएगा।

एसएसपी ने आढ़तियों के प्रमुख कन्हैया लाल बांका और अन्य नेताओं से बातचीत की। बांका ने हड़ताल के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक शैलरों की हड़ताल का समाधान नहीं निकलता, तब तक मंडी की स्थिति में सुधार नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी बताया कि धान की फसल को शैलरों में उतारा जाना है, लेकिन फिलहाल हालात ऐसे हैं कि कोई उपाय दिखाई नहीं दे रहा है।

इसके अतिरिक्त, बांका ने मोगा रोड पर स्थित लाल गोदामों में चावल की स्टोरेज से संबंधित जानकारी भी दी, जिसमें 950 गाड़ी चावल का भंडारण होना बताया गया। इस मुद्दे पर उन्होंने डीसी से बातचीत कर शैलर मालिकों की समस्याओं का जल्द हल निकालने की आवश्यकता महसूस करवाई।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विनाशकारी स्थिति को देखते हुए प्रशासन को शीघ्र कार्यवाही करनी होगी ताकि किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत और राहत मिल सके। यदि जल्द ही हड़ताल का समाधान नहीं किया गया, तो धान की फसल की स्थिति और भी खराब हो सकती है, जिसका प्रभाव पूरे क्षेत्र के कृषि व्यापार पर पड़ेगा। यह सरकारी अधिकारियों के लिए एक चुनौती है कि वे इस संकट को सुलझाने के लिए त्वरित कदम उठाएँ ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके और खरीदारी का कार्य फिर से शुरू हो सके।