आज जालंधर, पंजाब में भारतीय किसान यूनियन दोआबा द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 21 अक्टूबर को नेशनल हाईवे को जाम करने की चेतावनी दी गई है। यह हाईवे फगवाड़ा शुगर मिल के समीप जाम किया जाएगा। किसानों का कहना है कि यदि सरकार धान की खरीद प्रक्रिया को संरचना में सुधार नहीं करती है, तो वे यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। यूनियन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरे पंजाब में और भी अधिक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हर दिन एक नई रणनीति अपनाई जाएगी, जिसके चलते सरकार का कर्तव्य बनता है कि वह किसानों की धान के खरीद संबंधी समस्याओं का समाधान करे।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि पंजाब में धान की खरीद में कमी के चलते समग्र स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है। किसानों को शेलर मालिकों द्वारा धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी बदतर हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकार इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते, तो किसान शांत नहीं बैठेंगे। वे शेलर मालिकों के खिलाफ आंदोलन करने पर भी विचार कर रहे हैं। किसानों का साफ कहना है कि अपनी आवाज उठाने की आवश्यकता है, अन्यथा उन्हें सड़क पर उतरकर संघर्ष करना पड़ेगा।
यूनियन के सरदार राय ने इस बात पर जोर दिया कि अगर धान की खरीदी में कोई सुधार नहीं हुआ, तो यह न सिर्फ किसानों के लिए बल्कि पंजाब की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा झटका साबित होगा। पंजाब राज्य के सचिव सरदार सतनाम सिंह साहनी ने कहा कि अगर किसानों के मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो 21 अक्टूबर 2014 को सुबह 10 बजे फगवाड़ा शुगर मिल चौक पर हजारों किसान धान से भरी ट्रॉलियों के साथ पहुंचेंगे और अनिश्चितकाल के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करेंगे।
किसान संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वे शीघ्रता से उनकी शिकायतों का समाधान करें, ताकि किसानों को उनके मेहनत की उचित कीमत मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। इस समय किसानों की परेशानियों को सुनना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। अगर सरकार उनकी बात नहीं सुनती है, तो किसानों की आक्रोशित प्रतिक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस तरह के आंदोलन न केवल कृषि क्षेत्र में बल्कि समग्र विकास में भी बाधा डाल सकते हैं, अतः सरकार के लिए यह जरूरी है कि वे किसी भी तरह की स्थिति को नियंत्रण में रखें।
इस संकट के समय में किसानों के हक में आवाज उठाना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है, ताकि वे अपनी मेहनत के अनुसार लाभ प्राप्त कर सकें। आने वाले दिनों में किसान संगठनों की यह चेतावनी सरकार के लिए एक गंभीर संकेत है, जिसे समझना और इसके अनुसार कार्य करना जरूरी है।