पंजाब के 24 गांवों में पंचायत चुनाव स्थगित: नामांकन साइन में खामी बनी वजह!

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पंजाब चुनाव आयोग ने श्री मुक्तसर साहिब के गिद्दड़बाहा कस्बे के 24 गांवों में पंचायत चुनावों को रद्द करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह आदेश चुनाव आयोग ने फर्जीवाड़े के आरोपों के आधार पर जारी किया है। इस मामले में नामांकन प्रक्रिया के दौरान पाए गए विरोधाभासों के चलते चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया। जानकारी के अनुसार, नामांकन और पर्चा वापस लेने के समय उम्मीदवारों के हस्ताक्षर आपस में मेल नहीं खा रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप इन गांवों में पंचायत चुनावों पर रोक लगानी पड़ी।

पंजाब में पंचायत चुनावों को लेकर हाल ही में उच्च न्यायालय ने भी एक गंभीर निर्देश जारी किया है, जिसमें 250 पंचायतों के चुनाव पर रोक लगा दी गई है। अदालत ने सुनवाई के लिए याचिकाओं की तारीख 14 अक्टूबर तक टाल दी। इस उच्च न्यायालय के आदेश के तहत, जिन पंचायतों के चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है, उनकी चुनावी प्रक्रिया 16 अक्टूबर तक स्थगित रहेगी। अदालत ने इस मामले में स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य है और यह लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। चुनाव के नामांकन रद्द करने पर भी अदालत ने कठोर टिप्पणियां की हैं, जिसमें कहा गया है कि सिर्फ छोटे-मोटे कारणों के चलते किसी उम्मीदवार का नामांकन रद्द करना गलत है।

इस संबंध में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और लुधियाना सीट से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने चुनाव रद्द होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गिद्दड़बाहा के लोगों को बधाई दी है, और इसे सरकार द्वारा की गई गलतियों का परिणाम बताया। उनका कहना है कि यह एक बड़ी जीत है और कांग्रेस पार्टी सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखेगी। वडिंग ने स्पष्ट किया कि पंजाब के आम नागरिकों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं होने दिया जाएगा।

पंजाब में 15 अक्टूबर को होने वाले पंचायत चुनावों में इस बार पार्टी सिंबल के साथ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद, विपक्षी दलों की ओर से लगातार आरोप लग रहे हैं कि उनके समर्थकों और उम्मीदवारों के नामांकन को अवैध रूप से रद्द किया गया है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। इस विवाद की गहराई को देखते हुए मामला चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि अकाली दल और कांग्रेस उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ धक्का-मुक्की कर रहे हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर बन गई है।

इस प्रकार, पंजाब में पंचायत चुनावों की प्रक्रिया में चल रही अनियमितताओं और विवादों ने राजनीतिक माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया है। अब लोगों ने उच्च न्यायालय में अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगाई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। ऐसे समय में, चुनाव आयोग और न्यायपालिका की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि लोकतंत्र की नींव को सुरक्षित रखा जा सके।