अमित शाह से बातचीत के बाद धान खरीद की समस्या पर दिल्ली रवाना होंगे पंजाब सीएम!

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पंजाब में धान खरीद को लेकर उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से वार्ता की है। इस बातचीत में उन्होंने राइस मिलर्स से जुड़ी कई मुद्दों को उठाया है। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर जानकारी साझा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से ट्रांसपोर्टेशन लागत, स्टोरेज स्पेस की कमी, हाइब्रिड क्वालिटी और शैलर्स को होने वाले घाटे जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। सीएम ने आशा व्यक्त की है कि यह समस्याएं जल्द ही सुलझ जाएंगी।

सीएम भगवंत मान ने बताया कि वह जल्द ही मिलर्स के प्रतिनिधियों को लेकर दिल्ली जा रहे हैं, जहां वे अपनी मांगें केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के सामने रखेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस वर्ष पंजाब 180 लाख मीट्रिक टन धान का केंद्रीय पूल में योगदान करने की योजना बना रहा है। इसके लिए तैयारियों का काम तेजी से चल रहा है, और उन्होंने स्वयं मंडियों का दौरा किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आए।

इससे पहले, पंजाब सरकार ने मिलर्स के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे। पहले जब सरप्लस पैडी की आरओ (Release Order) प्रदान की जाती थी, तो इसके लिए 50 रुपए प्रति टन शुल्क लिया जाता था। लेकिन हाल ही में, इस शुल्क को घटाकर 10 रुपए प्रति टन कर दिया गया है। इसके साथ ही, यदि कोई व्यक्ति आरओ लेकर अगले दिन फसल उठा लेता है, तो उसे इस शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा, बीआरएल शैलरों पर कई कानूनी मामलों का निपटारा भी किया जाएगा। नए नियमों के तहत, शैलरों के सिस्टर पार्टनर या गारंटर भी कार्य करने के लिए सक्षम होंगे, जिससे लगभग 200 शैलरों को लाभ मिलेगा।

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मिलर्स अब जिले की किसी भी स्थान से धान उठा सकेंगे। इससे पहले, जिला स्तर के सर्किल काफी छोटे होते थे, लेकिन अब इन्हें विस्तारित किया गया है। यह निर्णय किसानों और मिलर्स दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहले नई मिलों को अक्सर पुरानी धान की आपूर्ति की जाती थी, जिससे उन्हें उचित लाभ नहीं मिल पाता था।

कुल मिलाकर, इन कदमों से न केवल मिलर्स की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि इससे पूरे पंजाब के धान उत्पादन और बिक्री में भी सुधार होगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की यह पहल किसानों की भलाई और उद्योग के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।