हत्या करने वाले दोनों भाइयों को आजीवन कारावास की सजा
रायगढ़, 10 अक्टूबर (हि.स.)। अपरसत्र न्यायालय के अभिषेक शर्मा अपर सत्र न्यायाधीश घरघोड़ा ने हत्या के आरोपित राजीव डेल्की एवं पिंटू उर्फमहेंद्र डेल्की निवासी मुंड़ा गांव रामनाथपुर थाना लैलूंगा जिला रायगढ़ को मृतक दिलेश्वर डेल्की की हत्या के आरोप में दोष सिद्ध करार देते हुए दोनों अभियुक्त भाइयों को आज गुरुवार काे आजीवन कारावास एवं एक हजार-एक हजार के जुर्माने के अर्थ दंड से दंडित करने का आदेश दिया।
19 जुलाई 2021 को समय 7:00 बजे मृतक की पुत्री, पीड़िता सुकृता डेल्की ने थाना लैलूंगा में आकर इस आशय की सूचना दी कि मृतक के खेत में लगे उड़द, फसल के ऊपर से आरोपितगण के द्वारा ट्रैक्टर चलवा कर नुकसान कर दिये जिस पर फसल की नुकसानी की बात कहने पर आरोपितों ने मृतक डिलेश्वर डेल्की से खेत के पास ही विवाद करना शुरू कर दिया। विवाद इतना बढा कि विधि के साथ संघर्षरत बालक ने एवं अभियुक्त राजीव डेलकी तथा पिंटू उर्फ महेंद्र डेल्की ने एक राय होकर मृतक दिलेश्वर डेलकी से गाली गलौज करते हुए मारपीट किया। आरोपित राजीव डेलकी ने फावड़ा के बेट से मृतक के बाएं कनपटी में प्राण घातक हमला कर दिया, जिसके मृतक जमीन पर गिर पड़ा तब अभियुक्त गण उसके ऊपर चढ़ बैठे और मारपीट किया और मौके से भाग गए थे उनके मारपीट करने से उसके पिता की मृत्यु हो गई थी।
पीड़िता सुकृता की उक्त सूचना पर तत्कालीन थाना प्रभारी एल पी पटेल ने आरक्षी केंद्र लैलूंगा के मर्ग क्रमांक 84 / 2021 धारा 174 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत मर्ग कायम कर विवेचना में लिया तथा जांच उपरांत आरोपी गण के विरुद्ध अपराध क्रमांक 302 / 201 धारा 302,34 भारतीय दंड विधान के तहत रिपोर्ट दर्ज कर प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।विवेचना उपरांत आरोपी गण राजीव डेल्की एवं महेंद्र डेल्की के विरुद्ध अपराध किया जाना सबूत होने पर धारा 302,34 भारतीय दंड संहिता के तहत अभियोग पत्र तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। माननीय न्यायालय ने प्रस्तुत चालान पर सुनवाई प्रारंभ की तथा विधिवत प्रकिया का पालन करते हुए प्रकरण के समस्त साक्षियों का परीक्षण प्रति परीक्षण उपरांत उभय पक्ष के तर्क श्रवण करने के बाद विद्वान न्यायालय ने आज अभियुक्त गण राजीव डेल्की एवं महेंद्र डेल्की उर्फ पिंटू को सिद्ध दोष पाते हुए धारा 302 भारतीय दंड संहिता के तहत मृतक दिलेश्वर डेल्की की हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास एवं 1000=1000 रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने अभियोजन का पक्ष रखा।
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