भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने शहीद भगत सिंह नगर जिले की मंडियों में धान की खरीद में देरी के खिलाफ आज एक बड़ा प्रदर्शन किया। किसानों, आढ़तियों, मजदूरों और शेलर मालिकों ने मिलकर मुख्य राजमार्ग को तीन घंटे तक जाम कर दिया। संगठन के जिला अध्यक्ष संतोख सिंह रैलमाजरा और जिला प्रेस सचिव कुलविंदर सिंह परागपुर ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार की ओर से समय पर धान की खरीद नहीं होने के कारण मंडियों में धान की बोरियों का ढेर लग गया है और लिफ्टिंग की प्रक्रिया भी ठप हो गई है।
उन्होंने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन आज पूरे पंजाब में किया गया, खासकर नवांशहर क्षेत्र में, जहां टोल प्लाजा बछुआं पर मुख्य राजमार्ग को जाम किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आज उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में अगले कदम पर चर्चा करेंगे। और यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो इस मुद्दे पर और भी कड़ा संघर्ष किया जाएगा।
इस प्रदर्शन के कारण यातायात पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया, जिससे आम जनता को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। कई लोग पैदल चलते हुए देखे गए, क्योंकि उनके पास वाहनों के माध्यम से जाने का कोई विकल्प नहीं था। केवल एंबुलेंस सेवाएं सूचारू रूप से चल रही थीं, जबकि हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस स्थिति ने एक बार फिर दिखा दिया है कि किस प्रकार से किसानों के मुद्दों को अनदेखा किया जा रहा है और उनके संघर्ष की आवश्यकता है।
किसान यूनियन के मुताबिक, उनकी मांगें न केवल किसानों के लिए बल्कि पूरे कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि धान की खरीद प्रक्रिया को तुरंत शुरू किया जाए ताकि किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए और उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए।
वास्तव में, यह प्रदर्शन न केवल धान की खरीद में देरी के खिलाफ था, बल्कि यह भारतीय किसान आंदोलन की निरंतरता का भी प्रतीक है, जो सरकार द्वारा अदृश्य बनाए गए मुद्दों पर प्रकाश डालता है। किसानों की एकता और उनमें गहरी निराशा इस बात का संकेत है कि उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान चिह्नित करने के लिए और भी अधिक संगठित होना पड़ेगा।