**किसानों का धरना: धान की बेकर्दी के खिलाफ लुधियाना-फिरोजपुर रोड पर विशाल प्रदर्शन**
पंजाब के जगराओं में रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में अनाज मंडियों में धान की बेकर्दी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण धरना आयोजित किया गया। यह धरना लुधियाना-फिरोजपुर रोड पर नानकसर के निकट तीन घंटे तक चला, जिसमें सैकड़ों किसान और शेलर मालिक एकत्र हुए। वे प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हाईवे को जाम कर दिया। इस आंदोलन में कई किसान संगठनों के प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया, जिसमें भारतीय किसान यूनियन एकता डकौदा, भारतीय किसान यूनियन लाखोवाल, जम्हूरी किसान सभा, आढ़ती एसोसिएशन जगराओं और शेलर ऑनर एसोसिएशन शामिल थे।
किसान नेताओं ने, जैसे जगतार सिंह देहडाका और जोगिंदर सिंह मलसीहां ने, अपने भाषण में भगवंत मान की सरकार को समय की सबसे अयोग्य सरकार बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मंडियों में अनाज की ख़रीद नहीं हो रही है, जबकि 12 दिन बीत चुके हैं। समस्याएं पहले भी थीं, परंतु इस बार स्थिति अधिक गंभीर है। शेलर मालिकों ने पिछले छह महीनों से अपने शेलरों में से चावल उठाने और उन्हें खाली करने की मांग की है, लेकिन सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि बाजार में धान के लिए कोई उचित मूल्य नहीं लगाया जा रहा है।
धरने में शामिल किसानों ने स्पष्ट किया कि शेलर मालिक पहले से खराब स्थिति का सामना कर रहे हैं, और अब नवीनतम धान की ख़रीद के मामले में भी उन्हें सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। धरने में शामिल किसानों में इंद्रजीत सिंह धालीवाल, तरसेम सिंह बासुवाल, और कई अन्य गांवों के किसान शामिल थे। सभी ने एकजुटता के साथ अपनी आवाज उठाई और सरकार के प्रति अपने असंतोष को व्यक्त किया। उनका मुख्य मुद्दा यह है कि सरकार की अनदेखी से न केवल किसान, बल्कि पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
किसान नेताओं ने यह भी जोड़ते हुए कहा कि मोदी और मान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि अगर उनके मुद्दों का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा। किसानों ने एकजुटता के साथ कहा कि वे अपनी मांगों के प्रति दृढ़ रहेंगे और जब तक उनकी सुनवाई नहीं होती, तब तक इस प्रकार के धरने जारी रहेंगे।
इस धरने ने यह संकेत दिया है कि किसान अपनी समस्याओं के समाधान के लिए तैयार हैं, और उनकी एकजुटता इस बात का प्रमाण है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने को प्रतिबद्ध हैं। सरकार को चाहिए कि वह किसानों की समस्याओं को गंभीरता से ले और शीघ्र समाधान निकाले ताकि इस संकट को टाला जा सके।