फाजिल्का जिले में धान की पराली जलाने के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया है कि यदि किसी क्षेत्र में धान की पराली जलती है, तो उस क्षेत्र का थाना प्रभारी (एसएचओ) पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) वरिंदर सिंह बराड़ ने बताया कि न केवल प्रशासनिक जवाब-तलबी की जाएगी, बल्कि इसके साथ ही कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) द्वारा पराली जलाने के खिलाफ सख्ती के बाद उठाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, न्यायालय ने स्पष्ट रूप से बताया है कि यदि किसी इलाके में धान की पराली जलाने की घटना शांत नहीं होती है, तो उस क्षेत्र के एसएचओ को इसके लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा। इसलिए, फाजिल्का जिले के थाना प्रभारियों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय निवासियों के साथ संवाद स्थापित करें और उन्हें धान की पराली जलाने से बचने के लिए प्रेरित करें। एसएसपी ने कहा कि यदि किसी भी क्षेत्र में पराली जलती है, तो उस इलाके के एसएचओ से जवाब मांगा जाएगा।
वरिंदर सिंह बराड़ ने यह भी बताया कि धान की पराली जलाने के मामले में एसएचओ के खिलाफ दो अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने थाना प्रभारियों को निर्देशित किया है कि वे किसानों को पराली जलाने के विभिन्न खतरे बताएं और कृषि विभाग द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार पराली को निपटाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि इस समस्या को हल करने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता जरूरी है।
अतः, फाजिल्का जिले में धान की पराली जलाने की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य न केवल पर्यावरण की सुरक्षा करना है, बल्कि किसान समुदाय को भी शिक्षित करना है कि पराली जलाने के हानिकारक प्रभाव क्या होते हैं। इस बाबत फाजिल्का जिले के अन्य थानों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि किसान अपनी पराली का निपटारा सही तरीके से करें।
इस प्रकार, प्रशासनिक पहल का लक्ष्य न केवल कानून का पालन करना है, बल्कि मृदा की गुणवत्ता बनाए रखना और प्रदूषण को कम करना भी है। आगे चलकर, उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार के उपायों से कृषि में सुधार होगा और पर्यावरणीय हानियों को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।