बरनाला में आज किसानों ने धान खरीद में चल रही अव्यवस्थाओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध कई स्थानों पर एकत्र हुए किसान संगठनों द्वारा किया गया, जिसमें विभिन्न मंडियों और खंडों में एक साथ प्रदर्शन देखने को मिला। किसान अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे, जिसमें महल कलां अनाज मंडी के सामने बरनाला-लुधियाना रोड, बड़बर दाना मंडी के पास बठिंडा-चंडीगढ़ रोड, रूडेके कलां अनाज मंडी के आसपास मानसा रोड और भदौड़ तीन कोनी चौक में फरीदकोट बरनाला रोड को जाम कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, बीकेयू उगराहां ने डी-मार्ट शॉपिंग मॉल के सामने भी धरना दिया।
प्रदर्शन के दौरान, किसान संगठनों के नेताओं ने बताया कि वे इस अव्यवस्था को लेकर कितने परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण किसान आज सड़क पर आने को मजबूर हो रहे हैं। उनका आरोप है कि दोनों सरकारें, केंद्रीय और पंजाब सरकार, मिलकर सिर्फ कॉर्पोरेट घरानों के हितों की रक्षा कर रही हैं, जबकि किसानों की धान की फसल मंडियों में सही ढंग से नहीं खरीदी जा रही है। किसानों ने यह भी कहा कि खरीदारी की व्यवस्थाएँ सही नहीं हैं, जिसके कारण उनकी फसलें मंडियों में धूल खा रही हैं।
किसानों ने यह भी बताया कि जिन मंडियों में खरीदारी की प्रक्रिया बहुत मंद चल रही है, वहां फसल की उठाई में बड़ी समस्या सामने आ रही है। इस समस्या के चलते उन्हें अपनी फसल का उठान करने में कठिनाई हो रही है, जिसके साथ ही बारदानों की कमी भी उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि गेहूं की बुआई का समय नजदीक आ रहा है, जैसे ही वे अपनी धान की फसल का काम निपटाते हैं, उन्हें अगले सीजन की पूरी तैयारी करनी होगी।
किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में धान खरीद में कोई सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़कें स्थाई रूप से जाम कर देंगे, साथ ही धान के ढेर सड़कों पर फेंकने का भी निर्णय ले सकते हैं। इस प्रकार की कार्रवाइयों के लिए दोनों सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। किसानों का यह ताजा आंदोलन उनकी बढ़ती निराशा का एक प्रमाण है, जो सरकार की ओर से अनदेखी की जा रही समस्याओं के प्रति उनके गुस्से की भी कहानी बयां करता है।
किसानों का यह प्रदर्शन केवल उनकी वर्तमान समस्याओं को उजागर नहीं करता, बल्कि यह उनकी आवाज़ का एक मजबूत संकेत भी है कि जब तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। ऐसे में सरकारी अधिकारियों और संगठनों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों की समस्याओं का समाधान निकालें, ताकि शांति और व्यवस्था स्थापित रह सके और किसान अपने मेहनत के फल को समय पर प्राप्त कर सकें।