लाइनमैन ट्रांसफर पर बवाल, चीफ इंजी. को सौंपा मांग पत्र

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**अमृतसर: बिजली बोर्ड कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन**

पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारियों का एक प्रतिनिधि मंडल, तकनीकी सेवा संघ के दिशा-निर्देशन में, बुधवार को बॉर्डर जोन के चीफ इंजीनियर से मिला। इस बैठक में उन्होंने विशेष रूप से टांगरा सबडिवीजन में तैनात लाइनमैन तलविंदर के लगातार तबादले के संबंध में अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल ने चीफ इंजीनियर बांगड़ को एक मांग पत्र भी सौंपा जिसमें उनकी मांगों का विस्तार से उल्लेख किया गया था। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधान जैमल सिंह और उपसचिव गुरप्रीत सिंह जस्सल ने की, जिसमें कई अन्य सदस्य भी शामिल थे।

इस अवसर पर प्रधान जैमल सिंह ने कहा कि जंडियाला गुरु के टांगरा सबडिवीजन में तैनात लाइनमैन का बिना वजह बार-बार तबादला किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिजली मंत्री, लाइनमैन के खिलाफ व्यक्तिगत पूर्वाग्रह रखते हुए इस स्थिति को उत्पन्न कर रहे हैं। इस कार्रवाई को अन्य कर्मचारियों के लिए अनुचित और अन्यायपूर्ण बताते हुए उन्होंने चीफ इंजीनियर से मांग की कि तुरंत इस तबादले को रद्द किया जाए।

जैमल सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि 20 अक्टूबर तक लाइनमैन का तबादला समाप्त नहीं किया गया, तो संघ द्वारा एक बड़े स्तर पर संघर्ष की शुरुआत की जाएगी। यह संघर्ष न केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए होगा, बल्कि बिजली बोर्ड के संविधान और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में सुधार नहीं हुआ, तो इससे न केवल एक व्यक्तिगत कर्मचारी प्रभावित होगा, बल्कि पूरे विभाग की कार्यसंस्कृति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

संघ के सदस्यों ने इस मामले में समर्थन की अपील करते हुए कहा कि वे सभी एकजुट हैं और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। कर्मचारियों के तहत यह जागरूकता बढ़ाने के लिए कई अन्य योजनाएँ भी प्रस्तावित की गई हैं, ताकि सभी कर्मचारी अपनी समस्याओं को सही मंच पर रख सकें। बिजली मंत्री से अपेक्षा की गई है कि वे इस मामले का संज्ञान लें और सम्मेलन की प्रक्रिया में सुधार करें ताकि सभी कर्मचारियों का हक सुरक्षित रह सके।

कुल मिलाकर, यह मामला न केवल एक लाइनमैन के तबादले का है, बल्कि इससे वस्तुतः पूरे कर्मचारियों के हित और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रश्न भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में कर्मचारी नेताओं का यह प्रयास उन्हें एकजुट कर सहानुभूति और समर्थन प्राप्त करने में कारगर साबित हो सकता है। यदि उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में व्यापक आंदोलन की संभावना बनी रहेगी।