चंडीगढ़ प्रशासन ने हरियाणा सरकार को एक जरूरी पत्र भेजते हुए उससे हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) अधिकारियों के दो पैनल भेजने का अनुरोध किया है। यह कदम अधिकारियों की भारी कमी के कारण उठाया गया है, जिसमें हाल ही में यूटी में चयनित दो एचसीएस अधिकारियों के नाम वापस लिए जाने की वजह से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। प्रशासन को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि अधिकारियों की कमी के कारण विभिन्न विभागों में काम का बोझ बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि हरियाणा सरकार तुरंत अधिकारी भेजने में विफल रहती है, तो यूटी प्रशासन केंद्र सरकार से भी अधिकारियों की मांग पर विचार कर सकता है।
इस बीच, चंडीगढ़ प्रशासन ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा से दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का चयन किया है। ये दोनों अधिकारी वित्त सचिव और डिप्टी कमिश्नर के महत्वपूर्ण पदों के लिए नियुक्त किए गए हैं। वित्त सचिव के रूप में पंजाब कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी दीप्रवा लाकड़ा को चुना गया है, जबकि 2013 बैच के हरियाणवी आईएएस अधिकारी निशांत कुमार यादव को डिप्टी कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया गया है। इन अधिकारियों का नवंबर में चंडीगढ़ में अपने पदों का कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके लिए संबंधित राज्य सरकारों को पहले उन्हें रिलीव करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अधिकारियों की कमी अब प्रशासन में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। कई कर्मचारी अतिरिक्त कार्यभार संभालने के कारण मानसिक और कार्यात्मक दबाव में हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण विभागीय निर्णय और नीतियों को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है। यदि हरियाणा और पंजाब की सरकारें अपने अधिकारियों को यूटी में भेजने में कोई रुकावट डालती हैं, तो प्रशासन केंद्र सरकार से दानिक्स के अधिकारियों की भी मांग कर सकता है।
इस समय चंडीगढ़ प्रशासन की स्थिति बहुत ही संवेदनशील है, और अधिकारियों की कमी से निपटना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सभी संबंधित पक्षों को इस समस्या का जल्द समाधान निकालने की आवश्यकता है, ताकि शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। अधिकारियों की प्रभावी तैनाती न केवल प्रशासनिक कार्यों को कुशल बनाती है बल्कि नागरिकों को भी बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करती है। इस पृष्ठभूमि में, चंडीगढ़ प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही हरियाणा सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी।