चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने रद्द किए 50 फ्लैट्स के आवंटन, नोटिस जारी!

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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने आवंटियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उन आवंटियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है जो अपनी लाइसेंस फीस का भुगतान नहीं कर रहे थे। सेक्टर 49, राम दरबार, सेक्टर 38 और औद्योगिक क्षेत्र में स्थित 50 आवासीय फ्लैटों का आवंटन अब रद्द कर दिया गया है। ये फ्लैट स्मॉल फ्लैट स्कीम के तहत आवंटित किए गए थे, जिसमें हर महीने लाइसेंस फीस का भुगतान अनिवार्य था। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन आवंटियों को अब 30 दिनों के भीतर अपने फ्लैट खाली करके उन्हें हाउसिंग बोर्ड को सौंपना होगा। यदि वे इस समय सीमा में फ्लैट खाली नहीं करते हैं, तो बोर्ड मजबूरन उन्हें खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इन आवंटियों को वर्ष 2018-2019 से लेकर अब तक 10 से अधिक बार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें उनसे उनके बकाया लाइसेंस फीस का भुगतान करने को कहा गया था। बोर्ड ने सितंबर में अंतिम बार सुनवाई का अवसर भी दिया, लेकिन अधिकतर आवंटियों ने न तो सुनवाई में भाग लिया और न ही कोई भी बकाया राशि का भुगतान किया। इसी के चलते सीएचबी ने इन 50 फ्लैटों के आवंटन को रद्द करने का निर्णय लिया है, जिसका अब वे गंभीर परिणाम भोगेंगे।

सीएचबी के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि लाइसेंस फीस न चुकाने के कारण हाउसिंग बोर्ड को 45 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया वसूलना है। यह राशि बड़े स्तर पर है और आने वाले समय में और भी आवंटियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। यह कदम न केवल उन आवंटियों के लिए एक चेतावनी है जो नियमित रूप से अपनी फीस का भुगतान नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह भी दर्शाता है कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड अपनी नीतियों को लागू करने के लिए गंभीर है।

जिन आवंटियों का आवंटन रद्द किया गया है उनमें सेक्टर 49 से 28 फ्लैट, राम दरबार से 6, सेक्टर 38W से 4 और औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 से 1 फ्लैट शामिल हैं। यह निर्णय न केवल सीएचबी की सख्ती को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भविष्य में अन्य आवंटियों के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की जाएगी। अनुशासन बनाए रखने और आवंटियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसा कदम उठाना आवश्यक था।

इस प्रकार, सीएचबी का यह निर्णय आवंटियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि यदि वे अपनी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करेंगे, तो उन्हें गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ेगा। आवंटियों को अब अपनी स्थिति को स्पष्ट करना होगा और समय पर अपने बकाया राशि का भुगतान करना होगा, अन्यथा उन्हें आवास से वंचित किया जा सकता है।