बरनाला विधानसभा उप चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया समाप्त होने के पश्चात, सभी राजनीतिक दलों के नेता चुनावी प्रचार में जुट गए हैं। भाजपा के उम्मीदवार केवल सिंह ढिल्लों ने हाल ही में व्यापारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि व्यापारियों को जीएसटी के नाम पर अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है, और उन्होंने इस पर कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया।
ढिल्लों ने कहा कि वर्तमान में त्योहारों का समय है, जब व्यापारियों के लिए आय का मुख्य स्रोत होता है। उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष में होने वाली अधिकांश कमाई इन त्योहारों के समय पर निर्भर करती है। ऐसे में, अगर अधिकारियों द्वारा व्यापारियों को परेशानी दी जाती है, तो यह न केवल अन्याय है, बल्कि व्यापार को भी प्रभावित करता है। ढिल्लों ने यह भी उल्लेख किया कि गांवों से आने वाले ग्राहकों के लिए भी ट्रैफिक पुलिस द्वारा मुश्किलें उत्पन्न की जा रही हैं। उन्होंने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इस प्रकार का व्यवहार कतई उचित नहीं है।
सिर्फ व्यापारिक गतिविधियों पर अवरोध नहीं, बल्कि दुकानदारों के सामान को लेकर भी समस्याएं उत्पन्न की जा रही हैं, जो ढिल्लों के अनुसार, व्यापारियों के लिए अतिरिक्त बाधाएं पैदा करती हैं। उन्होंने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि वह उनके साथ खड़े हैं और इस तरह के दबाव को सहन नहीं किया जाएगा। भाजपा ने हमेशा व्यापारियों के अधिकारों के लिए खड़े होने का संकल्प लिया है और यह उनका एक प्रमुख मुद्दा है।
इस बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र गर्ग नीटा, जिला परिषद सदस्य कुलदीप सिंह धालीवाल और करण ढिल्लों समेत बड़ी संख्या में व्यापारी और दुकानदार उपस्थित थे। इस एकजुटता से पता चलता है कि भाजपा का समर्थन व्यवसायियों के बीच काफी मजबूत है। ढिल्लों ने आगामी चुनावों के संदर्भ में भी अपने विचार साझा किए और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनका समर्थन बढ़ेगा, जिससे व्यापारिक समुदाय के हितों की रक्षा हो सकेगी।
कुल मिलाकर, बरनाला उप चुनाव में भाजपा उम्मीदवारी को मजबूत बनाने के लिए केवल सिंह ढिल्लों ने व्यापारियों के साथ मिलकर एक स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें जीएसटी और ट्रैफिक पुलिस की ओर से होने वाली परेशानियों का सामना करने के लिए एकजुट रहना चाहिए। यह बैठक साक्षात इस बात का प्रमाण है कि व्यापारियों को उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। अब देखना है कि चुनाव में यह समर्थन कैसे परिणाम लाता है।