अमृतसर के पुलिस कमिश्नर, गुरप्रीत सिंह भुल्लर, ने आज शहीद हुए पुलिस मुलाजिमों के परिवारों से मिलकर गहरा संवेदनशीलता का अनुभव किया। पुलिस शहीद दिवस पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उन्होंने उन वीर जवानों को अलविदा कहा, जिन्होंने अपने कर्तव्य की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी। इस अवसर पर उपस्थित सभी ने आंखों में आंसू और हृदय में सम्मान के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में जिलाधिकारी साक्षी साहनी, सभी पुलिस अधिकारी तथा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रो. लक्ष्मी कांता चावला भी मौजूद थे।
पुलिस कमिश्नर भुल्लर ने शहीदों के परिवारों के साथ मुलाकात की, जहां उन्होंने शहीदी के किस्सों को साझा किया। जब परिवारों ने अपने प्रियजनों की शहादत की कहानियां सुनाईं, तो कमिश्नर की आंखें भी नम हो गईं। कई परिवारों ने अपने माता-पिता, पत्नियों और बच्चों को याद करते हुए इस बात का आभार व्यक्त किया कि वे इस अवसर पर यहां एकत्र हुए हैं। उन्होंने बताया कि हर साल 21 अक्टूबर को शहीद पुलिस मुलाजिमों की शहादत को सम्मानित किया जाता है और यह दिन हमें उनके बलिदान की याद दिलाता है।
गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने पंजाब के काले दौर के किस्से सुनाते हुए कहा कि अनेक परिवारों ने अपने बेटों को खोया, जिसके कारण आज पंजाब में अमन और शांति की वापसी संभव हो सकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज जो भी लोग शांति से जी रहे हैं, वे सभी शहीद मुलाजिमों के बलिदान के कारण है। पुलिस कमिश्नर ने यह भी बताया कि किस प्रकार उन्होंने कई बार अपने अधिकारियों को बुलेट प्रूफ जैकेट्स पहनने के लिए मजबूर किया, क्योंकि पंजाब के सिपाही अपने अदम्य साहस के लिए प्रसिद्ध हैं और कई बार बिना सुरक्षा के ही दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार रहते थे।
इस समारोह में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ उनके सम्मान में परेड का आयोजन भी किया गया। पुलिस कमिश्नर भुल्लर ने शहीद परिवारों से यह आश्वासन दिया कि पुलिस विभाग के सभी सदस्य हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे और वे सभी शहीदों के कर्जदार हैं। यह दिन हमें यथार्थ में उन नायकों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देकर समाज की रक्षा की। ऐसे में शहीदों की बहादुरी और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और यह सच्चाई हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी।