अमृतसर: मंत्री के ऑडियो का हंगामा, बिक्रम मजीठिया ने सीबीआई जांच की मांग की!

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पंजाब के पंचायत चुनावों में राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। विभिन्न विपक्षी दलों के नेता, विशेष रूप से अकाली दल के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह चुनावी प्रक्रिया को स्वच्छ और निष्पक्ष तरीके से संचालित नहीं कर रही। मजीठिया ने हाल ही में एक वीडियो क्लिप साझा किया है, जिसमें राज्य के कैबिनेट मंत्री कुलदीप धालीवाल एक उम्मीदवार को धमकी देते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के माध्यम से मजीठिया ने आरोप लगाया कि धालीवाल उसी व्यक्ति को धमका रहे हैं, जिसे बाद में एक गैंगस्टर ने भी अपने तरीके से डराया।

वीडियो में कैबिनेट मंत्री धालीवाल उस व्यक्ति से बात कर रहे हैं और स्पष्टत: कह रहे हैं कि उन्हें अगली बार पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाएगा, जबकि इस बार दूसरी पार्टी को मौका देंगे। इस संदर्भ में मजीठिया ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए इसे पंचायत चुनावों में गुंडागर्दी की एक और मिसाल बताया। उन्होंने विशेष रूप से अजनाला के गांव निजामपुर का उल्लेख करते हुए कहा कि धालीवाल वहां के निवासी सरवन सिंह को अपनी पार्टी के लिए उम्मीदवार बनने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसके अलावा, मजीठिया ने यह भी आरोप लगाया कि अब गैंगस्टर भी सरवन सिंह को धमका रहा है, और यह एक गंभीर चिंता का विषय है।

बिक्रम सिंह मजीठिया ने खुलकर कहा कि यह घटना इस बात का सबूत है कि आम आदमी पार्टी और गैंगस्टर एक जाल में बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा, “ये घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सरकार न केवल चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा रही है, बल्कि वह गैंगस्टरों के साथ मिलकर इसकी साजिश रच रही है।” मजीठिया ने हाल ही में जैतो हलके से विधायक अमोलक सिंह के एक संदर्भ का भी जिक्र किया जिसमें कुछ इसी तरह की स्थिति देखी गई थी। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, और सुझाव दिया कि इसकी जांच सीबीआई से होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने पोस्ट में कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब चुनाव आयोग का जिक्र करते हुए उन सभी को टैग किया है। यह स्पष्ट है कि मजीठिया द्वारा उठाए गए ये मुद्दे चुनावी माहौल को और अधिक उग्र बना सकते हैं। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आते ही राजनीतिक माहौल को विखंडित करने का काम किया है, जिसका असर साफ तौर पर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ रहा है।

इन घटनाओं ने न केवल राज्य के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, बल्कि मतदाताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। ऐसे में देखना होगा कि आम आदमी पार्टी अपनी छवि को सुधारने के लिए क्या कदम उठाएगी और क्या इस मुद्दे का कोई ठोस हल निकलेगा।