पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तरनतारन जिले में चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक सहायक सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) को 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी मंगलवार को हुई जब जिला तरनतारन के हेल्पलाइन नंबर 112 पर तैनात एएसआई राज कुमार को रंगे हाथ पकड़ा गया। विजिलेंस Bureau के प्रवक्ता के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई राज करन नामक शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद की गई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि एएसआई ने उनके मोबाइल फोन को लौटाने और उनके साथी को फर्जी एनडीपीएस मामले से बचाने के लिए 30,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के बाद विजिलेंस Bureau ने आरोप की प्रारंभिक जांच की और उसके बाद जाल बिछाने का निर्णय लिया। इस दौरान, टीम ने दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में एएसआई को 5000 रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। इस एक्शन ने सिर्फ एक पुलिसकर्मी को ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है।
विजिलेंस Bureau के प्रवक्ता ने इस मामले में एक और चौंकाने वाली बात का खुलासा किया, जिसके अनुसार आरोपी एएसआई एक ‘हनी ट्रैप नेटवर्क’ का हिस्सा था। यह नेटवर्क महिलाओं, अन्य पुलिस अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों से मिलकर बना था। आरोपी, अपने साथियों के जरिए अनजान व्यक्तियों को आसानी से होटलों में ले जाने के लिए फुसलाता था और बाद में मौके पर पहुंचकर उन्हें ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलने का कार्य करता था।
इस प्रकार के नेटवर्कों और गतिविधियों ने समाज में पुलिस की छवि को धूमिल किया है और यह दर्शाता है कि कुछ पुलिसकर्मी किस हद तक भ्रष्टाचार में लिप्त हो सकते हैं। विजिलेंस Bureau ने इस संदर्भ में थाना रेंज अमृतसर में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया है। आगे, आरोपी को कल अदालत में पेश किया जाएगा और इस मामले की जांच जारी रहेगी।
इन घटनाओं में लोगों का विश्वास कानून व्यवस्था पर कम हुआ है, और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए ऐसी कार्रवाइयां अत्यंत आवश्यक हैं। लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेना और भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाना ही सही दिशा में एक कदम होगा। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जागरूकता फैलाने और जांच प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने की जरूरत है ताकि समाज में एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण वातावरण बनाया जा सके।