चंडीगढ़ PGI ड्रग सेंटर में बढ़ेंगी सेवाएं: महिलाओं के लिए विशेष इलाज की व्यवस्था!

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पीजीआई चंडीगढ़ तेजी से उत्तर भारत का पहला अस्पताल बनने की दिशा में अग्रसर है, जहाँ महिलाओं के लिए ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर (डी.डी.टी.सी.) में इलाज की सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। वर्तमान में इस सेंटर में केवल पुरुष मरीजों के लिए उपचार की व्यवस्था है, लेकिन अब परिस्थिति में बदलाव देखने को मिल रहा है। नशे की प्रवृत्ति अब महिलाओं को भी प्रभावित कर रही है, जिसके कारण उनके लिए अलग से उपचार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अस्पताल की योजना है कि यह सेंटर जिसमें वर्तमान समय में 20 बेड की व्यवस्था है, उसे 50 बेड तक बढ़ाया जाएगा। इस सेंटर में हर साल लगभग 4,000 नए मामलों की संख्या दर्ज की जाती है, जिनमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों के मरीज शामिल होते हैं।

पीजीआई के साइकेट्री विभाग के एडिशनल प्रोफेसर सुबोध बी.एन. का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इस सेंटर में मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब महिलाओं के लिए विशेष रूप से बेड और उपचार की सुविधाएं देने की योजना बनाई जा रही है। उत्तर भारत में सरकारी स्तर पर महिलाओं को सस्ती और प्रभावी उपचार सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि निजी अस्पतालों में इलाज कराना आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है। ऐसे में सरकारी सेंटर की ओर महिलाओं का रुझान बढ़ने की संभावना है।

पिछले साल पीजीआई के ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में कुल 36,683 मरीजों का इलाज किया गया। इनमें से 12,570 मरीज चंडीगढ़ के थे, जबकि 24,112 मरीज अन्य राज्यों से आए थे। सबसे प्रभावित आयु वर्ग 26 से 35 वर्ष के युवा थे, जिनकी संख्या 16,039 थी। इसके अलावा, 13 से 25 वर्ष की आयु के 8,739 और 35 से 45 वर्ष के 7,313 मरीज भी यहाँ उपचार के लिए आए। इस आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि नशे की प्रवृत्ति विभिन्न आयु समूहों तक पहुँच रही है, जो चिंता का विषय है।

चंडीगढ़ में पीजीआई एकमात्र ऐसा संस्थान है, जो ड्रग डी-एडिक्शन का समूचित इलाज करता है। यहाँ केवल सैक्टर-32 और 16 के अस्पतालों में मनोरोग सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि जी.एम.एस.एच. में पहले नशा मुक्ति केंद्र था, जिसे कोविड-19 के दौरान बंद कर दिया गया। अब, स्टाफ की कमी के कारण इसे पुनः शुरू नहीं किया जा सका है। वर्तमान में, पीजीआई में केवल दो मनोचिकित्सक ही नशा और मनोरोग के मरीजों का ध्यान रख रहे हैं, जो कि बढ़ते मामलों के संदर्भ में अपर्याप्त है।

इसके मद्देनजर, प्रशासन ने डी-एडिक्शन सेंटर में स्टाफ की संख्या बढ़ाने और नई उपचार सुविधाओं को शुरू करने की योजना बनाई है। जिससे मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी और उन्हें उचित उपचार दिया जा सकेगा। यह कदम न केवल मरीजों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में नशे की प्रवृत्ति का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए भी आवश्यक है।