चंडीगढ़-अंबाला रेल ट्रैक पर निरीक्षण: धीमी गति सुधारने के 3 विकल्प सुझाए

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चंडीगढ़ और अंबाला के बीच ट्रेन यात्रा की गति को बढ़ाने के लिए प्रयासों की एक नई लहर शुरू हो गई है। रेलवे बोर्ड ने हाल ही में इस महत्वपूर्ण रेलवे ट्रैक का निरीक्षण किया, जिसका मुख्य उद्देश्य इस मार्ग पर उन स्थानों की पहचान करना है, जहां ट्रेन की गति को बढ़ाया जा सके। वर्तमान में, इस ट्रैक पर 16 मोड़ हैं, जो ट्रेनों की गति को 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित रखते हैं। पहले भी, 2019 में फ्रेंच रेलवे की टीम एस.एन.सी.एफ. द्वारा इस ट्रैक का एक सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें ट्रेन की गति बढ़ाने के लिए तीन विस्तृत सुझाव दिए गए थे। हालांकि, कोविड-19 महामारी ने इस परियोजना के कार्य को रोक दिया था, लेकिन अब एक बार फिर इस दिशा में काम शुरू किया जा रहा है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि गति बढ़ाने के लिए सबसे पहले ट्रैक का पुनर्निर्माण जरूरी होगा। इसके लिए कुछ स्थानों पर ट्रैक के करीब स्थित इमारतों को हटाना पड़ेगा। वर्तमान में चंडीगढ़-अंबाला के बीच के लिए उपलब्ध सबसे तेज ट्रेन शताब्दी है, लेकिन इस मार्ग पर इसकी गति अन्य मार्गों की तुलना में कम हो जाती है। अगर अंबाला से दिल्ली के बीच की बात करें तो शताब्दी की गति लगभग 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाती है, जो इस मार्ग की क्षमता को दर्शाता है।

2019 में फ्रेंच रेलवे टीम द्वारा दिए गए सुझाव में ट्रेन की गति बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख विकल्प दिए गए थे। इनमें से पहला सुझाव था ट्रैक और पावर सप्लाई में सुधार करना, जिससे रेलवे लाइन और सिग्नल सिस्टम को उन्नत किया जा सके ताकि ट्रेन 220 किलोमीटर प्रति घंटे की गति प्राप्त कर सकें। इसके लिए अनुमानित खर्च 7 हजार करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

दूसरा विकल्प ट्रैक का अपग्रेडेशन है, जिसमें ट्रैक को 200 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के लिए विकसित करना होगा। इसके लिए प्रति किलोमीटर लगभग 46 लाख रुपये का खर्च आ सकता है। तीसरे सुझाव में मौजूदा समस्याओं का मामला है, जिसमें वर्तमान ट्रैक का वजन 52 के.जी प्रति मीटर है। गति बढ़ाने के लिए इसे कम से कम 60 के.जी प्रति मीटर पर लाना होगा। साथ ही, ट्रैक पर मौजूद कई स्थानों पर फाटकों को हटाकर अंडरपास या अंडरब्रिज का निर्माण करना आवश्यक होगा ताकि ट्रेनों को सुगम और सुरक्षित मार्ग मिल सके।

इस परियोजना के क्रियान्वयन से न केवल चंडीगढ़ और अंबाला के बीच यात्रा का अनुभव बेहतर होगा, बल्कि यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों के समय की बचत के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। रेलवे विभाग की योजनाओं को सफल बनाना अब क्षेत्रीय विकास के लिए एक आवश्यक कदम साबित हो सकता है।