दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी से घोघा डेयरी कालोनी में दूध कलेक्शन सेंटर स्थापित करने पर विचार करने को कहा

Share

दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी से घोघा डेयरी कालोनी में दूध कलेक्शन सेंटर स्थापित करने पर विचार करने को कहा

नई दिल्ली, 20 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम के आयुक्त से घोघा डेयरी कालोनी में अमूल या मदर डेयरी की तरह का कोई कोऑपरेटिव दूध का कलेक्शन सेंटर स्थापित करने पर विचार करने को कहा है। कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर दूध का कलेक्शन सेंटर स्थापित होगा तो दूध उत्पादकों को उनके उत्पाद के लिए तैयार उपभोक्ता मिलेगा।

दरअसल, दिल्ली नगर निगम ने हाई कोर्ट के समक्ष घोघा डेयरी कालोनी का मास्टर प्लान रखा है, जिसके मुताबिक भलस्वा डेयरी से शिफ्ट करने वालों के लिए प्लाट आवंटित किये जाएंगे। दिल्ली नगर निगम ने कहा कि हर प्लाट का लेआउट तैयार करके दिल्ली नगर निगम के सदन में रखा जाएगा और अंतिम लेआउट हाई कोर्ट में 25 अगस्त तक दाखिल कर दिया जाएगा। इस पर हाई कोर्ट ने नगर निगम के कमिश्नर से कहा कि आप घोघा डेयरी कालोनी में अमूल, मदर डेयरी की तरह का कोऑपरेटिव दूध कलेक्शन सेंटर स्थापित करने पर विचार करें। इससे डेयरी के लोगों को लाभ होगा।

दरअसल, भलस्वा डेयरी समेत दिल्ली के कई डेयरियों के निवासियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मांग की है कि उन्हें डिमोलिशन की कार्रवाई से सुरक्षा मिले। उनकी अर्जी में कहा गया है कि अगर उनके ठिकानों को हटाया जाएगा तो वे आशियाना विहीन हो जाएंगे। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि हम जिस मसले पर सुनवाई कर रहे हैं वे आपलोग नहीं समझ रहे हैं। हाई कोर्ट ने दिल्ली के निवासियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जहां मवेशियों को कचरा खाने को मिलता है और वे दूषित दूध देते हैं। अगर मवेशी दूषित कचरा खाएंगे तो वे स्वस्थ दूध का उत्पादन कहां से करेंगे। हम जो भी कर रहे हैं वो अपने लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि डेयरी को हटाने से रोकने की मांग करने वालों से कहा आपको डेयरियों की चिंता नहीं बल्कि संपत्तियों की चिंता है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली नगर निगम ने कहा था कि वे डेयरियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं बल्कि डेयरी की भूमि पर बने अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं। दरअसल, दिल्ली के ककरोला डेयरी, गोयला डेयरी, नांगली शक्रावती डेयरी, झड़ौदा डेयरी, भलस्वा डेयरी, गाजीपुर डेयरी, शाहाबाद दौलतपुर डेयरी, मदनपुर खादर डेयरी और मसूदपुर डेयरी के लोगों ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।

इसके पहले 24 जुलाई को हाई कोर्ट ने भलस्वा से सभी डेयरियों को घोघा डेयरी कालोनी में चार हफ्ते के अंदर शिफ्ट करने का आदेश दिया था। इसी आदेश का अनुपालन करते हुए दिल्ली नगर निगम की टीम पुलिस बलों के साथ भलस्वा डेयरी डेमोलिशन करने पहुंची थी। याचिका सुनयना सिब्बल, अशर जेसुदौस और अक्षिता कुकरेजा ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि लैंडफिल साइट के पास बनी डेयरियां कानून का खुला उल्लंघन कर रही हैं। इन डेयरियों में पशुओं के साथ क्रूरता बरती जाती है और जानवरों की अधिकता इतनी ज्यादा है कि कई बार जानवर मल पर ही लेटे रहते हैं। इससे मच्छर पैदा होते हैं।

याचिका में कहा गया है कि इसके पहले हाई कोर्ट ने इन डेयरियों को दिल्ली के नगर निगम के इलाकों से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया था लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर गौरी पुरी ने कोर्ट को बताया था कि इन डेयरियों में पशुओं को ऑक्सीटोसिन की खुराक धड़ल्ले से दी जाती है, ताकि दूध ज्यादा निकाला जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार/ संजय