प्रयागराज, 22 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आयुष विभाग से सेवानिवृत्त डॉक्टर की तदर्थ सेवा जोड़कर फुल पेंशन निर्धारित करने के एकलपीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति समय के नियम लागू होंगे, संशोधित भूतलक्षी नियमावली से किसी के कानूनी अधिकार नहीं छीने जा सकते। कोर्ट ने एकलपीठ के तदर्थ सेवा जोड़कर फुल पेंशन देने के फैसले को सही माना और हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एस क्यू एच रिजवी की खंडपीठ ने दिया है। अपील पर विपक्षी महेंद्र सिंह व दो अन्य डॉक्टरों के अधिवक्ता ने प्रतिवाद किया।
मालूम हो कि विपक्षी डॉक्टरों की तदर्थ नियुक्ति 18 जून 1988 को आयुष विभाग में हुई थी। 16 मार्च 2005 को इन्हें नियमित किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद इन्होंने तदर्थ सेवा शामिल कर पेंशन निर्धारित करने की अर्जी दी। जिसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि संशोधित कानून के तहत तदर्थ सेवा क्वालिफाइंग सर्विसेज में नहीं जोड़ी जा सकती। जिसकी चुनौती याचिका एकलपीठ ने स्वीकार करते हुए तदर्थ सेवा जोड़कर पूरी पेंशन देने का निर्देश दिया था। जिसको विशेष अपील में चुनौती दी गई थी।