नई दिल्ली, 02 जनवरी (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार वीवो इंडिया के अंतरिम सीईओ हांग शुकुआन ऊर्फ टेरी समेत तीन आरोपितों को रिहा करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
पटियाला हाउस कोर्ट ने 30 दिसंबर को तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए रिहा करने का आदेश दिया था। इन तीनों आरोपितों को ईडी ने 23 दिसंबर को हिरासत में लिया था। ईडी ने वीवो इंडिया के अंतरिम सीईओ हांग शुकुआन ऊर्फ टेरी के अलावा सीएफओ हरिंदर दहिया और कंसल्टेंट हेमंत मुंजाल को गिरफ्तार किया था।
इससे पहले 20 दिसंबर को कोर्ट ने ईडी की ओर से चार्जशीट दाखिल पर संज्ञान लिया था। एडिशनल सेशंस जज किरण गुप्ता ने इस मामले के चार आरोपितों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी करके हरि ओम राय, नितिन गर्ग, राजन मलिक और गोंगवेन कुआंग को 19 फरवरी, 2024 को पेश होने का आदेश दिया है। चारों आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले में ईडी ने 7 दिसंबर को चार्जशीट दाखिल करके वीवो के मैनेजिंग डायरेक्टर हरिओम राय समेत चारों को आरोपित बनाया है, जिन्हें 10 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने इन सभी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपित बनाया है। ईडी के मुताबिक वीवो इंडिया ने गलत तरीके से धन हासिल किया, जो भारत की आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरा है।
ईडी ने वीवो और उससे जुड़े लोगों पर जुलाई 2022 में देशभर के 48 स्थानों पर छापा मारा था। ईडी ने वीवो कंपनी से जुड़ी 23 कंपनियों पर भी छापा मारा था। ईडी का दावा है कि छापे के दौरान मनी लांड्रिंग के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ था। इस मामले में कई चीनी नागरिक और भारतीय कंपनियां शामिल हैं। करीब 62,476 करोड़ रुपये की रकम वीवो ने गैरकानूनी रूप से चीन ट्रांसफर की थी। ये रकम भारत में टैक्स से बचने के लिए चीन ट्रांसफर की गई थी।