दिल्ली हाई कोर्ट ने आनंद रंगनाथन के खिलाफ अवमानना मामले की कार्रवाई बंद की

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नई दिल्ली, 03 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा को राहत देने से सम्बन्धित अवमानना के मामले में लेखक आनंद रंगनाथन के खिलाफ चल रही कार्रवाई बंद कर दी है। जस्टिस सुरेश कैत ने अवमानना कार्यवाही बंद करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि इस मामले में तमिल राजनीतिक साप्ताहिक तुगलक, आरएसएस विचारक एस गुरुमूर्ति और फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री को बरी किया जा चुका है। गुरुमूर्ति को 2019 में बरी किया गया था, जबकि विवेक अग्निहोत्री को 2023 में बरी किया गया था। दोनों ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था। कोर्ट ने विवेक अग्निहोत्री को भविष्य में सतर्क रहने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि ट्विटर कई सारे दुखों का स्रोत है।

कोर्ट ने कहा कि रंगनाथन इस मामले में असली मानहानिकर्ता नहीं थे, बल्कि उन्होंने ट्वीट करने वाले के पक्ष में केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। रंगनाथन ने अपने हलफनामा में कहा था कि उन्होंने गुरुमूर्ति के ट्वीट का समर्थन नहीं किया था। कोर्ट ने आज इस मामले में स्वराज्य मैगजीन को भी बरी कर दिया। स्वराज्य मैगजीन ने भी हलफनामा दायर कर बिना शर्त माफी मांगी थी।

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस मुरलीधर की बेंच से गौतम नवलखा को राहत का आदेश देने के बाद विवेक अग्निहोत्री ने जस्टिस मुरलीधर पर पक्षपात का आरोप लगाया था। उसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर, 2018 को स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी। गुरुमूर्ति ने अपने ट्वीट में गौतम नवलखा के ट्रांजिट रिमांड के आदेश को निरस्त करने के जस्टिस मुरलीधर के आदेश का जिक्र किया था।

गुरुमूर्ति ने अपने ट्वीट में कहा था कि दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर का गौतम नवलखा से रिश्ते का खुलासा क्यों नहीं हुआ ( ‘Why has Delhi High Court Justice Muralidhar’s relationship with Gautam Navlakha not been disclosed?’)। गुरुमूर्ति के इस ट्वीट की शिकायत वकील राजशेखर राव ने तत्कालीन चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन को पत्र लिखकर की थी । अपने शिकायत में राजशेखर राव ने कहा था कि गुरुमूर्ति का ट्वीट सिटिंग हाई कोर्ट के जज पर जानबूझकर किया गया हमला है।