11HREG333 योगी सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के शोध के लिए प्रदेश में बनाएगी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
ललखनऊ, 11 सितम्बर (हि.स.)। योगी सरकार प्रदेश में गैर पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों को बढ़ावा देने, ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन को देखते हुए स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन स्त्रोतों के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-23 का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिये हैं।
योगी सरकार जल्द उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-23 लेकर आ सकती है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने एवं नवाचार के लिए विभिन्न प्रकार की रियायतों के साथ सब्सिडी दी जाएगी। इसके लिए यूपीनेडा को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। यह नीति प्रदेश में अगले पांच वर्षों के लिए लागू होगी, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को पूरे देश में सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन निर्माता बनाना है।
ग्रीन हाइड्रोजन के शोध और नवाचार के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का किया जाएगा निर्माण
उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-23 का उद्देश्य प्रदेश को वर्ष 2028 तक 0.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता वाला राज्य बनाना है। इसके साथ ही प्रदेश को वर्ष 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया उत्पादक और 100 प्रतिशत खपत करने वाला राज्य बनाना है। इतना ही नहीं नीति का उद्देश्य प्रदेश में हाइड्रोजन खपत वाले इलाकों को चिन्हित करना है और यहां पर ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया को बढ़ावा देना है। नीति के तहत ग्रीन हाइड्रोजन के शोध, अनुसंधान, विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण किया जाएगा।
प्रदेश में हाइड्रोजन की वर्तमान मांग लगभग 0.9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसका मुख्य रूप से उपयोग उर्वरक और रिफाइनरी क्षेत्र में किया जाता है। प्रदेश अपनी इस मांग को पूरा करने के लिए नीति के जरिये औद्योगिक बुनियादी ढ़ांचे को मजबूत करेगा। योगी सरकार ग्रीन हाइड्रोजन इकाइयों की स्थापना के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इससे ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया की नई परियोजनाओं और मौजूदा इकाइयों के विस्तार में मदद मिलेगी। वहीं योगी सरकार प्लांट की स्थापना के लिए लैंड बैंक और पानी की उपलब्धता का आंकड़ा तैयार करा रही है ताकि निवेशकों को आवश्यकता अनुसार जमीन, पानी और बिजली की पर्याप्त सप्लाई की जा सके।
कार्बन डाईआक्साइड रिकवरी यूनिट्स को किया जाएगा स्थापित
उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-23 के तहत ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया के पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन खपत वाले क्षेत्रों में हाइड्रोजन ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसी के साथ ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया के लिए औद्योगिक क्लस्टर और केंद्र के विकास पर जोर दिया जाएगा। नीति में बायोगैस एवं अन्य उद्योगों से उत्पन्न होने वाली कार्बन को उपयोगी बनाने के लिए कार्बन डाईआक्साइड रिकवरी यूनिट्स को स्थापित किया जाएगा। इलेक्ट्रोलाइजर विनिमार्ण के साथ-साथ उत्पादन से उपयोग केंद्रों तक राइट ऑफ वे आरओडब्ल्यू का आंकलन कर ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया और उनके सह उत्पादों के भंडारण एवं परिवहन आदि के प्रौद्योगिकी विकास में सहयाेग किया जाएगा।