11HREG294 हिन्दी पखवाड़ा ही नहीं बल्कि पूरा वर्ष रहे हिन्दीमय : कुलपति
कानपुर, 11 सितम्बर (हि.स.)। देश के आजाद होने के बाद भी आज हमें हिन्दी पखवाड़ा व हिन्दी दिवस मनाने की जरूरत पडती है, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके पीछे हमारा अव्यवस्थित प्रारूप है कि हिन्दी और संस्कृत केवल एक भाषा बनकर रह गयी है। हिन्दी में कई महान प्रखर लेखक व कवि रहे हैं, लेकिन आज लोग इसे पढ़ने में भी कतराते हैं। हिन्दी में प्रौद्योगिकी तथा तकनीकी विषयों पर कार्य होना जरूरी है ताकि मूलभाषा पर लोगों की रुचि बनी रहे। अपनी भाषा तथा उस पर कार्य सिर्फ व्याख्यान तक ना हो किंतु उस पर अमल भी हो। हम इस तरह कार्य करें कि सिर्फ एक हिन्दी पखवाड़ा नहीं बल्कि पूरा वर्ष ही हिन्दीमय रहे। यह बातें सोमवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने कही।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित हिंदी पखवाड़ा के क्रम में सोमवार को विश्वविद्यालय में विभिन्न व्याख्यानों एवं अनेक प्रतियोगिताओं को आयोजन किया गया। प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने हिन्दी भाषा तथा भारत की राजभाषा पर रोशनी डालते हुए कहा कि हिन्दी कैसे राष्ट्रभाषा बनने में नाकाम रही तथा कैसे लोगों ने इस पर स्वीकार्यता नहीं दी। हिन्दी कश्मीर से कन्याकुमारी तक की भाषा नहीं बन पाई। विश्वभर में लगभग 70 करोड़ लोग हिन्दी बोलते हैं तथा 115 देशों में हिन्दी के विभाग है। हिन्दी विश्वभर में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।
प्रो. अवस्थी ने महराजा ययाति तथा कानपुर के कई कवियों व लेखकों के बारे में बताया। सोहन लाल द्विवेदी, गणेश शंकर विद्यार्थी को याद करते हुये उन्होंने लोगों को जाग्रत करने का प्रयास किया। हिन्दी की 20 विभिन्न भाषाओं तथा प्रकारों पर भी चर्चा की। प्रो. अवस्थी ने कहा कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है, जोकि मां से जुड़ी है, जो हमें भावुक कर देती है। हमारा भाव व अपनत्व इससे जुड़ा रहता है और हमें अपनत्व का आभास होता है।
प्रो. गिरीश नाथ झा ने कहा कि हिन्दी भाषा को तकनीकी रूप से अन्य भाषाओं से जोड़ कर हम उसे प्रखर बना सकते हैं। प्रो. नंद किशोर पांडे ने कहा कि हिन्दी माध्यम व अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वालों का अनुपात 1:5 है, किंतु आज भी लोग अंग्रेजी बोलने व पढ़ने के बाद लोग वो हासिल नहीं कर पाए जो वह मूल भाषा से पढ़कर कर सकते हैं। हमें अपनी निज भाषा बोलने पर आत्म सम्मान व आत्म गौरव की अनुभूति होनी चाहिए।
इस अवसर पर डॉ विकास यादव, डॉ सोनाली मौर्या, डॉ प्रभात गौरव मिश्रा, डॉ प्रीति वर्धन दुबे एवं समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।