चित्रकूट: अधर में लटका राम वन गमन पथ प्रोजेक्ट

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07HREG390 चित्रकूट: अधर में लटका राम वन गमन पथ प्रोजेक्ट

चित्रकूट, 7 सितंबर (हि.स.)। 14 वर्ष के वनवास काल के समय प्रभु श्रीराम ने साढ़े 11 वर्षों का समय चित्रकूट में व्यतीत किया था, प्रभु श्रीराम अयोध्या से चलकर गंगा पार करते हुए प्रयागराज होते हुए यमुना नदी को पार किया और वे वाल्मीकि आश्रम पहुंचे इसके बाद चित्रकूट आए और चित्रकूट के राजा महाराजाधिराज मत्तगयेंद्र नाथ सरकार से अनुमति लेकर पर्णकुटी बनाकर रहे, तत्पश्चात उन्होंने कामदगिरि को अपना निवास स्थान बनाया, प्रभु श्रीराम, जानकी एवं अनुज लक्ष्मण के साथ उन्होंने गुप्त गोदावरी, सती अनुसुईया, जानकीकुंड, स्फटिक शिला, अत्रिमुनि आश्रम, सरभंग ऋषि आश्रम गए और ऋषि मुनियों से शिक्षा ग्रहण किया, तत्पश्चात वे सिद्ध मुनि आश्रम सिद्धा पहाड़ पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि राक्षसों के आतंक से ऋषि मुनियों की हड्डियों का पहाड़ बन गया है, उनका हृदय द्रवित हुआ और उन्होंने वहीं से प्रतिज्ञा की कि अब इस धरती को राक्षसों से विहीन किया जाएगा और वे रामबन होते हुए दक्षिण की ओर गए, पन्ना में सुतीक्षण आश्रम के बाद महाराष्ट्र नासिक पहुंचे नासिक से श्रीलंका तक की पदयात्रा के पास रावण का वध किया और राक्षसों का विनाश करने के बाद एक बार वे फिर चित्रकूट वापस लौटे, जहां 33 करोड़ देवी देवताओं ने कामदगिरि पर्वत में दीप प्रज्वलित करके प्रभु श्रीराम का स्वागत किया था।

चित्रकूट ऋषि मुनियों की तपोभूमि है प्रभु श्रीराम ने साढ़े 11वर्षों तक चित्रकूट में रहकर तप किया था, इसी को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा राम वन गमन पथ की योजना बनाई और जहां जहां प्रभु श्री राम के चरण पड़े, राम वन गमन मार्ग के रूप में उसे विकसित करने का प्लान बनाया गया। इस दौरान सन 2017 में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा 64 करोड़ की लागत से चित्रकूट एमपी एरिया में राम वन गमन मार्ग एवं पर्यटक स्थलों के विकास हेतु प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया, लेकिन कोरोना काल के कारण योजना कारगर साबित नहीं हुई, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के चित्रकूट को बजट देने की बजाय चित्रकूट उत्तर प्रदेश को 50 करोड रुपए राम वन गमन पथ के विकास के लिए प्रदान कर दिए गए जिसके तहत उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा रामघाट में घाट के सौंदरीकरण, राघव प्रयाग घाट में लोहे का पुल, पर्यटन कार्यालय सहित कई कार्य किए गए, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा अभी तक मध्य प्रदेश सरकार व मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को कोई राशि नहीं दी गई जिससे कि एमपी के चित्रकूट में राम बन गमन पथ का विकास हो सके, जबकि एमपी के चित्रकूट में ही सबसे अधिक पर्यटक स्थल मौजूद हैं, लेकिन चित्रकूट दो राज्यों की सीमा में बंटा हुआ है, इस कारण भी चित्रकूट का सही ढंग से विकास नहीं हो पा रहा।

उत्तर प्रदेश की सड़क बेहतर हैं, किन्तु जैसे ही चित्रकूट के एमपी एरिया में प्रवेश करते हैं। बदसूरत सड़कें चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं पर्यटक स्थलों में प्रशासन द्वारा पार्किंग वसूली जाती है लेकिन पर्यटकों के वाहन खड़े करने के लिए कहीं भी जगह तक नहीं है, सड़कों की हालत बदतर हो गई है, पर्यटक स्थलों , मठ मंदिर आश्रमों में भी पुजापा के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली होती है। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश का चित्रकूट विकास से कोसों दूर है।

गौरतलब है कि एमपी के चित्रकूट की विधानसभा में कांग्रेस के विधायक हैं और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है अब ऐसे में कांग्रेस के विधायक भाजपा सरकार को दोषी ठहराते हैं तो वहीं भाजपा के नेता चित्रकूट में कांग्रेस का विधायक होने की बात कह कर विकास की बात को टाल देते हैं और इस करण भी चित्रकूट का विकास नहीं हो पा रहा है।

चित्रकूट के संतों तथा समाजसेवियों एवं आमजन की यह भी मांग है कि चित्रकूट को दो राज्यों की सीमा से अलग कर दिया जाए या तो इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए या फिर चित्रकूट को विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण घोषित कर दिया जाए जिससे कि प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट का विकास हो सके।