08HREG370 भाषा से हमारे संस्कार एवं परम्परा की झलक : प्रो. आनंद शंकर सिंह
प्रयागराज, 08 सितम्बर (हि.स.)। कोई भी भाषा केवल भाषा नहीं होती वह अपने आप में एक संस्कृति का वहन करती है, जो हमारे संस्कार एवं परम्परा को दर्शाते हैं। भारतीय संस्कृति के ज्ञान के लिए संस्कृत का जानना बहुत आवश्यक है। संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो सम्प्रेषण का सर्वोत्तम और सरल माध्यम है।
यह बातें ईश्वर शरण महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने छात्र-छात्राओं को शुभाशीष देते हुए कहा कि आज संस्कृत जैसी समृद्ध भाषा को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है। जिससे हमारी संस्कृति और संस्कार अक्षुण्ण बना रहे।
शुक्रवार को महाविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा सभागार में संस्कृत दिवसोत्सव के उपलक्ष्य में श्लोक पाठ एवं संस्कृत पठन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ अविनाश पाण्डेय, डॉ वेद प्रकाश मिश्र, डॉ महेश प्रसाद राय रहे। इसके पश्चात संस्कृत पठन प्रतियोगिता प्रारम्भ हुई, जिसमें डॉ अखिलेश पाल, डॉ शैलेश यादव, डॉ कृपा किंजलकम निर्णायक की भूमिका में रहे।
डॉ मनोज कुमार दूबे ने बताया कि श्लोक पाठ प्रतियोगिता में प्रियांशु गोस्वामी प्रथम, शार्दुल द्वितीय, तृतीय निधि झा एवं संयुक्त रूप से अर्पित पाण्डेय एवं आंचल पटेल रहीं। संस्कृत पठन प्रतियोगिता में ऋषिकेष गुप्ता एवं निधि झा को संयुक्त रूप से प्रथम, रागिनी त्रिपाठी को द्वितीय, साधना चौरसिया, अस्मिता चौरसिया को संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
डॉ एकात्मदेव ने विजेता प्रतिभागियों के नाम की घोषणा की एवं धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत विभाग की संयोजिका डॉ रचना सिंह ने किया। संचालन डॉ अश्विनी देवी ने एवं डॉ प्रियंका सिंह ने प्रतियोगिताओं में सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ अमिता पाण्डेय, डॉ गायत्री सिंह, डॉ हर्षमणि, डॉ विवेक यादव, डॉ शाइस्ता इरशाद आदि उपस्थित रहे।