अनूपपुर: सावन के पहले सोमवार को मां नर्मदा उद्गम जल से जालेश्वर धाम महादेव में हुआ जलाभिषेक

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10HREG337 रतलाम: एक हजार से अधिक श्रद्धालु बसों व अन्य चार पहिया वाहनों के साथ भगवान महाकाल के दर्शन करने उज्जैन पहुंचे

रतलाम, 10 जुलाई (हि.स.)। श्रावण-पुरूषोत्तम मास में प्रत्येक सोमवार को भगवान महाकाल उज्जैन की नि:शुल्क यात्रा करवाने के संकल्प के साथ आज सिविक सेंटर काशी विश्वनाथ मंदिर से 12 बसों एवं चार पहिया वाहनों का काफिला आयोजक जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष प्रभु राठौड़ के नेतृत्व में आज सुबह रवाना हुआ। उसके पूर्व शहर के विभिन्न मार्गों में जहां-जहां यह काफिला निकला लोगों ने जोरदार स्वागत किया। राठौड़ परिवार द्वारा काशी विश्वनाथ महादेव की पूजा अर्चना अनुष्ठान कर मां बगलामुखी शक्तिपीठ (खाचरौद) के पीठाधीश्वर कृष्णानंदजी महाराज के आतिथ्य में श्रद्धालुओं को बसों में बैठाकर उज्जैन महाकाल तीर्थ के लिए रवाना किया।

पहली बार रतलाम से उज्जैन तक निकली यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह था। यात्रा में सबसे आगे भोलेनाथ के भजन चल रहे थे तो पीछे वाहन पर भगवान भोलेनाथ की विशालकाय प्रतिमा के साथ प्रकाश प्रभु राठौड़ व राजेश दवे सवार थे। इनके पीछे चार पहिया वाहन एवं बसों में सवार श्रद्धालू थे जो कि हर-हर महादेव एवं जय महाकाल का उद्घोष कर रहे थे। काशी विश्वनाथ महादेव मंदिर से शुरू हुई यात्रा शास्त्री नगर मेन रोड, पावरहाउस रोड, सैलाना बस स्टैंड, राम मंदिर, कस्तूरबा नगर, 80 फीट रोड, अलकापुरी चौराहा से पुन:राम मंदिर होते हुए शहर सराय, धानमंडी, हरदेवलाल पीपली, तोपखाना, चांदनी चौक, चौमुखीपुल, गणेश देवरी, डालूमोदी बाजार, कॉलेज रोड, न्यू रोड, दो बत्ती, स्टेशन रोड, दिलबहार चौराहा, महू रोड बस स्टैंड, सालाखेड़ी होते हुए उज्जैन महाकाल के लिए रवाना हुए।

उज्जैन में बुजुर्गों के लिए उपलब्ध कराई ई-रिक्शा

यात्रा दोपहर करीब 12.30 बजे उज्जैन पहुंची। उज्जैन पहुंचते ही श्रद्धालु भगवान भोले की भक्ति में झूम उठे। श्रद्धालुओं को पहले केसर पैलेस पर रुकवाया। यहां से ढोल-ढमाकों के साथ सभी यात्री महाकाल दर्शन के लिए पैदल रवाना हुए। बुजुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए महाकाल मंदिर तक ई-रिक्शा में सवार कर ले जाया गया। महाकाल बाबा के दर्शन कर 108 स्थानों के जल से अभिषेक किया गया। बसों व अन्य वाहनों में सवार यात्रियों का खास ध्यान रखा गया। यात्रियों को गंगाजल एवं अभिमंत्रित रुद्राक्ष का वितरण किया गया। पूरी व्यवस्था महाकाल सेवक संभाल रहे थे।