04HREG334 सरकार और समाज दोनों को आगे आकर नदियों को बचाना होगा : रामाशीष
गंगा हमारी संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा : रामाशीष
प्रयागराज, 04 जून (हि.स.)। भारत विकास परिषद प्रयाग शाखा की ओर से पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर ‘स्वच्छ और हरा भरा शहर’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष ने कहा कि गंगा हमारी संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा है।
रविवार को सिविल लाइन स्थित एक होटल में आयोजित गोष्ठी में उन्होंने कहा कि भारतवर्ष की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या का भरण पोषण गंगा पर निर्भर है। परंतु आज गंगा सहित भारत वर्ष की छोटी-बड़ी नदियों की जो स्थिति है, वह मानव सभ्यता के लिए खतरा है।
उन्होंने कहा कि संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, अनियोजित विकास, पेड़ों की कटाई, नदियों पर अवैध कब्जे और खनन, बढ़ती आबादी, विकृत आस्थाएं और उपभोक्तावादी संस्कृति इसके लिए जिम्मेदार है।
रामाशीष ने कहा कि सरकारों और समाजों दोनों को आगे आकर अपनी नदियों को बचाना होगा। पानी के उपयोग को कम एवं उसकी बर्बादी को रोकना होगा और प्लास्टिक के उपयोग और प्रदूषण पर रोक लगानी होगी। नदियों के किनारे वृक्षों का रोपण करना होगा। तभी हम अपनी नदियों, पर्यावरण और सभ्यता की रक्षा कर पाएंगे।
शाखा के अध्यक्ष डॉ अल्पना अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकृति की व्यवस्था में जब तक हम सभी स्वाभाविक रूप से सम्मिलित नहीं होते हैं, तब तक पर्यावरण की समस्या हल नहीं हो सकती है। प्रकृति से स्वाभाविक सम्बंधों को हम भूल गए हैं और कृत्रिमता हावी है। मनुष्य इस प्रकृति के साथ और सानिध्य में रहकर ही पर्यावरण की रक्षा कर सकता है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ सुनील कांत मिश्र ने कहा कि प्लास्टिक ने पर्यावरण को इतना अधिक नुकसान पहुंचाया है कि आज मनुष्य जाति लगातार प्राकृतिक आपदाओं का शिकार हो रही है और जीवन खतरे में है। इसलिए वह समय आ गया है कि हम सभी मिलकर पर्यावरण की रक्षा के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करें।
अतिथि परिचय शरद गुप्ता तथा धन्यवाद ज्ञापन राजीव अग्रवाल ने किया। डॉ नवीन चंद्र अग्रवाल तथा डॉ उमेश प्रताप सिंह ने शाल ओढ़ाकर और मोमेंटो प्रदान कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इस अवसर पर चिंतामणि सिंह, राजीव माहेश्वरी, प्रमोद बंसल, जेके जायसवाल, प्रो. पुरुषोत्तम, राकेश मित्तल, सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।