व्यक्तित्व निर्माणशाला : 21 दिनों के 320 घंटों में होगा राष्ट्र चिंतक का निर्माण

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09HREG92 व्यक्तित्व निर्माणशाला : 21 दिनों के 320 घंटों में होगा राष्ट्र चिंतक का निर्माण

झांसी,09 जून (हि.स.)। वीरांगना भूमि झांसी के भानी देवी गोयल विद्या मंदिर में 22 मई से 12 जून 21 दिन तक राष्ट्रीय स्वयं संघ का कानपुर प्रान्त का शिक्षा वर्ग आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ग में कुल 282 प्रशिक्षणार्थी शामिल है। इनके समग्र विकास के लिए 200 से अधिक शिक्षक और व्यवस्थापक दिन रात मेहनत कर रहे हैं। इन प्रशिक्षणार्थियों में छात्रों से लेकर अध्यापक इंजीनियर और लगभग हर वर्ग के प्रशिक्षणार्थी जुड़े हुए हैं, लेकिन सभी समान भाव से राष्ट्र निर्माण के भाव को जाग्रत करने में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर 21 दिनों के 320 घंटों में एक आम जनमानस को राष्ट्र चिंतक में बदलने का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की व्यक्तित्व निर्माणशाला में कार्य किया जा रहा है।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर 21 दिनों में केवल 320 घंटे ही क्यों ? तो चलिए आपकी यह जिज्ञासा भी पूरी कर देते हैं। दरअसल 21 दिनों में से केवल 20 दिन ही प्रशिक्षणार्थियों को वास्तव में संघ शिक्षा वर्ग के अनुशासन का बोध हो पाता है। 20 दिनों में सुबह ब्रम्ह मुहूर्त से लेकर रात 10 बजे तक प्रतिदिन 16 घंटे प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को घड़े की तरह गढ़ा जाता है। इस प्रकार 20 दिन के 320 घंटों में एक स्वयं सेवक प्रथम वर्ष शिक्षण के बाद तैयार हो जाता है। उसके अंदर न केवल देश प्रेम की अलख जगाई जाती है बल्कि इस भौतिकवादी चकाचौंध में रहते हुए अपने कर्तव्य पालन की शिक्षा दी जाती है। साथ ही इस दौरान उसके दिमाग में उठने वाली तमाम जिज्ञासाओं को शांत किया जाता है।

इसके बाद 20वें दिन उनके दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाता है। इसमें उन्होंने राष्ट्र प्रेम से लेकर शारीरिक व बौद्धिक स्तर पर अनुशासित होकर क्या सीखा उसका परीक्षण भी होता है। 21वें दिन जब प्रशिक्षणार्थी वापस अपने घर लौट रहा होता है तो उसका राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भाव स्पष्ट होता है और उसी राष्ट्रप्रेम व मानवता का उदाहरण कर्नाटक में हुए ट्रेन हादसे के बाद स्वयंसेवकों का देखा भी गया। रेल हादसे के बाद घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाला दल स्वयंसेवकों का ही था। यही नहीं 500 यूनिट खून देकर बिना भेद भाव के तमाम घायलों को जीवन देने का कार्य भी इन्हीं स्वयंसेवकों द्वारा किया गया। यह ज्वलंत उदाहरण है। वैसे अब तक अनगिनत उदाहरण देश और दुनिया के सामने रहे हैं। आज ऐसे ही तैयार किए गए हजारों लाखों स्वयंसेवक बिना नाम व दिखावा किए बगैर विभिन्न क्षेत्रों में मानवता को बचाने का कार्य कर रहे हैं।