रंगकर्मी बोले, लखनऊ में अब नहीं रही नाटकों के दर्शकों की कमी

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07HENT10 रंगकर्मी बोले, लखनऊ में अब नहीं रही नाटकों के दर्शकों की कमी

लखनऊ, 07 जून (हि.स.)। शहर में अब नाटक देखने वाले दर्शकों की कमी नहीं रही है। पिछले महीने हुए ‘दर्पण’ के हीरक जयंती नाट्य समारोह व फरवरी में ‘मंचकृति’ की ओर से वर्ल्ड रिकार्ड बनाने के लिए एक महीने तक चले नाट्य उत्सव में दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिली। पूरे नाट्य उत्सव में थियेटर दर्शकों से पूरा खचाखच भरा दिखाई दिया। इससे मंच के कलाकार व निर्देशक बहुत उत्साहित हैं। अब इस शहर में भी महाराष्ट्र व पश्चिमी बंगाल की तरह ही नाटकों के टिकटेड शो हो सकते हैं।

लखनऊ दर्पण के सेक्रेटरी डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया कि अगर अच्छे नाटक होते हैं तो दर्शक यहां पर भी आते हैं। यहां पर नाटक और संस्था की रिपुटेशन भी काम करती है। अगर नाट्य संस्था की रिपुटेशन अच्छी है तो दर्शक जरूर नाटक देखने आते हैं। उन्होंने कहा कि नाटकों का भी एक खास दर्शक वर्ग है। इसका एक उदाहरण हमारे नाट्य समारोह में देखने को मिला। आई.ए.एस और डाक्टर्स भी नाटक देखने बराबर आए। उन्होंने कहा कि इसका प्रचार होना भी जरूरी है। बाम्बे में तो नाटकों की होर्डिंग्स तक लगती है। अखबार या सोशल मीडिया के जरिए दर्शकों की नजर में आना तो चाहिए।

उन्होंने बताया कि नाट्य सस्था ‘मंचकृति’ की ओर से वर्ल्ड रिकार्ड बनाने के लिए दो फरवरी से चार मार्च तक एक महीनें लगातार अलग-अलग नाटकों के शो चले और उनमें भी बराबर दर्शक आए। संस्था के निर्देशक संगम बहुगुणा इसे बहुत उत्साहित हैं। वह तो यहां तक कहते हैं कि अब नाटकों के टिकटेड शो करेंगे। चाहे सौ रूपए ही रखें, लेकिन इस बार टिकट लगाएंगे। बताया कि अब इस शहर में नाटक के दर्शक हैं। वह यहां तक कहते हैं कि अब तो दर्शकों संभालना मुश्किल हो जाता है।

सत्यपथ रंगमण्डल के संस्थापक व युवा निर्देशक मुकेश वर्मा, जो कभी अपने विवादित नाटकों से चर्चित रहे हैं, वह भी कहते हैं कि अब वो बात नहीं रही, जो आठ से पहले हुआ करती है। रंगकर्मी दर्शकों की चिंता किया करते थे, अब बराबर दर्शक नाटक देखने आ रहे हैं।